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आखिरी सांस तक निभाई साथ जीने-मरने की कसम, पत्नी की मौत के एक घण्टे बाद पति ने भी तोड़ा दम

केकड़ीः रामलाल माली व सोहनी देवी माली की फाइल फोटो।

केकड़ी, 15 सितंबर (आदित्य न्यूज नेटवर्क): भारतीय हिन्दू संस्कृति में विवाह के समय अग्नि के समक्ष सात फेरे यूं ही नहीं लेते। गठजोड़ के वक्त पति-पत्नी को साथ जीने और साथ मरने, जन्म-जन्म का साथ निभाने ,सुख-दुख में भागीदार बनने सहित कई वचन दिए जाते हैं। आखिर दोनों में से एक के जीवन पर भी कोई संकट कैसे आ जाए। पति की एक-एक सांस पर पत्नी का अधिकार है, तो पत्नी का भी पति के जीवन पर उतना ही हक है। पति के बिना पत्नी का तो पत्नी के बिना पति का जीवन अधूरा रहता है। मानों दोनों के लिए लहू का एक-एक कतरा ही उनका जीवन है। ऐसा ही एक मामला बुधवार को समीपवर्ती बघेरा में चरितार्थ हुआ। जहां सलारी गेट पर रहने वाले माली परिवार में पत्नी की मौत का सदमा पति सहन नहीं कर पाया और पत्नी की मौत के एक घण्टे बाद पति ने भी यह दुनियां छोड़ दी। एक साथ पति-पत्नी की मौत से गांव में मातम छा गया।

केकड़ीः समीपवर्ती बघेरा में एक ही चिता पर पति-पत्नी का अंतिम संस्कार करते परिजन।

एक साथ उठी पति-पत्नी की अर्थी प्राप्त जानकारी के अनुसार बघेरा में सलारी गेट के समीप रहने वाली सोहनी देवी (64) पत्नी रामलाल माली बुधवार शाम को घर में अकेली थी। टेबल फैन को एक तरफ रखते समय उसमे प्रवाहित हुए करन्ट की चपेट में आने से सोहनी देवी की मौत हो गई। घटना के कुछ देर बाद पति रामलाल माली (74) पुत्र नन्दा माली घर पहुंचा। कमरे में पत्नी को बेसुध हालात में देख रामलाल को दिल का दौरा पड़ गया और वह वहीं अचेत होकर गिर गया। कुछ देर बाद रामलाल माली की भी मौत हो गई। एक साथ दो मौत होने पर गांव में शोक की लहर छा गई। परिजन समेत मोहल्ले वासियों की रुलाई फूट पड़ी। गुरुवार सुबह एक ही चिता पर पति-पत्नी का दाह संस्कार कर दिया गया।

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