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पुत्र को जिनशासन की सेवा में समर्पित करना गौरवशाली कदम, जैन समाज ने माता—पिता का किया बहुमान

केकड़ी: मुनि सुश्रुत सागर महाराज की वंदना करते सांसारिक परिवार के सदस्य।

केकड़ी, 03 अगस्त (आदित्य न्यूज नेटवर्क): यहां देवगांव गेट स्थित चन्द्रप्रभु चैत्यालय में चल रहे चातुर्मासिक प्रवचन के दौरान गुरुवार को जैन समाज की ओर से दिगम्बर जैन मुनि सुश्रुत सागर महाराज के सांसारिक माता—पिता एवं भ्राता का केकड़ी आगमन पर बहुमान किया गया। समाज के पदाधिकारियों ने खरेड़ी जिला दमोह (म.प्र.) से आए पिता सुनील कुमार, माता विकास बाला एवं भ्राता गौरव कुमार जैन का तिलक, माला व शाल ओढाकर सम्मान किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि वे माता—पिता धन्य है जिन्होंने अपने पुत्र को जिनशासन की सेवा के लिए समर्पित कर दिया। इस दौरान श्रावक श्राविकाओं ने करतल ध्वनि के साथ हर्ष व्यक्त किया तथा परिवारजन की अनुमोदना की।

परम सुख के लिए त्यागने होंगे अशांति के कारण प्रवचन सभा को संबोधित करते हुए मुनि सुश्रुत सागर महाराज ने कहा कि जब तक मुंह में राग, द्वेष, मोह, माया, विषय, भोग आदि विकल्पों रूपी नमक की डली रहेगी, तब तक आत्मा को परमसुख रूपी मिश्री का स्वाद नहीं आ सकता। परम सुख और शांति के लिए अशांति के कारणों को त्यागना होगा और कषाय रहित भाव से सभी प्रकार के अंतरंग और बहिरंग परिग्रहों को छोड़ना होगा। इसी के साथ शुद्ध स्वभावी आत्मा का चिंतन करना होगा तथा आत्मा की शरण में आना होगा। हर व्यक्ति को परमात्मा की आराधना करते हुए स्वयं की आत्मा में परमात्मा को देखना चाहिए। तभी जीवन का कल्याण हो सकता है।

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