Friday, February 27, 2026
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सिद्धचक्र महामंडल विधान: श्रावक-श्राविकाओं ने समर्पित किए 64 श्रीफल अर्घ्य, मुनिश्री ने दिया देव-गुरु व माता-पिता की सेवा का संदेश

केकड़ी, 27 फरवरी (आदित्य न्यूज नेटवर्क): गणाचार्य विराग सागर महाराज के सुशिष्य मुनि विकसंतसागर महाराज ने कहा कि पुण्यशाली जीव ही मनुष्य जीवन प्राप्त करते है। इसीलिए मनुष्य को अपने जीवन में कभी भी प्रभु, गुरु व माता-पिता का अनादर नहीं करना चाहिए। वे बोहरा कॉलोनी स्थित नेमिनाथ मंदिर के संत भवन में आयोजित श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के दौरान आयोजित धर्मसभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि देवपूजा, गुरु उपासना व माता-पिता की सेवा ही तीनों लोकों के सुख प्राप्त करने के साधन हैं। इनका अनादर करने वाले व्यक्ति को अनेक जन्मों तक कष्ट भोगने पड़ते हैं। उन्होंने सिद्धचक्र महामंडल विधान को भक्ति का महापर्व बताते हुए कहा कि इससे महान पुण्य का संचय होता है।

धार्मिक अनुष्ठानों की धूम: मुनिश्री ने बताया कि प्रभु की भक्ति के लिए देवता भी अष्टान्हिका पर्व में मध्य लोक में आकर आराधना करते हैं। हम सौभाग्यशाली हैं कि हमें साक्षात प्रभु भक्ति व आराधना का अवसर प्राप्त हो रहा है। समाज के अध्यक्ष ज्ञान चंद जैन (ज्वैलर्स) व मंत्री कैलाश जैन (मावा वाले) ने बताया कि विधान के दौरान प्रभु के चरणों में 64 श्रीफल सहित अर्घ्य समर्पित किए गए। मीडिया प्रभारी रमेश बंसल व पारस जैन ने बताया कि सुबह मुनिश्री के सानिध्य में जिनाभिषेक, शांतिधारा व नित्य नियम पूजा संपन्न हुई। यह आयोजन पंडित निकेत शास्त्री व देशना दीदी के निर्देशन में आयोजित किया जा रहा है।

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