केकड़ी, 12 अप्रैल (आदित्य न्यूज नेटवर्क): अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश (प्रथम) ने पिता की हत्या करने व साक्ष्य मिटाने के आरोपी पुत्र सहित दो अभियुक्तों को दोषमुक्त करने का आदेश दिया है। न्यायालय ने बचाव पक्ष के तर्कों व अभियोजन के गवाहों के बयानों में मौजूद विरोधाभास को देखते हुए यह फैसला सुनाया। क्या था मामला: प्रकरण के अनुसार टांकावास निवासी परिवादी हंसराज ने सावर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि सितंबर 2023 में जब वह रामदेवरा पदयात्रा पर था, तब उसे पिता कैलाश खटीक की मृत्यु की सूचना मिली। घर पहुंचने पर पिता के शरीर पर चोट के निशान मिले, जिसके बारे में बड़े भाई कन्हैयालाल ने नशे में गिरने की बात कही व आनन-फानन में अंतिम संस्कार करवा दिया।

पुलिस अनुसंधान व आरोप: ग्रामीणों के संदेह और पूछताछ के बाद मामला पुलिस तक पहुंचा था। पुलिस अनुसंधान में यह आरोप लगाया गया था कि कन्हैयालाल ने चारपाई की लकड़ी से अपने पिता के सिर पर वार किया, जिससे उनकी मौत हो गई। सावर थाना पुलिस ने हत्या के आरोप में कन्हैयालाल व साक्ष्य मिटाने के आरोप में महावीर खटीक के विरुद्ध धारा 302 व 201 के तहत मामला दर्ज कर आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया था।

न्यायालय का फैसला: सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 11 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए। बचाव पक्ष के अधिवक्ता निर्मल चौधरी ने न्यायालय में तर्क दिया कि गवाहों के कथनों में भारी विरोधाभास है, जिससे अभियोजन की कहानी संदिग्ध हो जाती है। माननीय न्यायालय ने अधिवक्ता के तर्कों से सहमति जताते हुए माना कि साक्ष्यों के अभाव और बयानों में विसंगति के चलते आरोपियों के खिलाफ जुर्म साबित नहीं होता। इसके साथ ही न्यायालय ने कन्हैयालाल व महावीर खटीक को संदेह का लाभ देते हुए ससम्मान बरी करने के आदेश जारी किए।
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