केकड़ी, 01 अगस्त (आदित्य न्यूज नेटवर्क): सड़क दुर्घटना के एक मामले में पुलिस अनुसंधान अधिकारी पर मृतक के परिजनों से कथित तौर पर एक विशेष अधिवक्ता को नियुक्त करने के लिए दबाव बनाने तथा बात न मानने पर क्लेम प्रभावित करने की धमकी देने का गंभीर मामला सामने आया है। इस संबंध में अखिल भारतीय संयुक्त अधिवक्ता मंच के प्रदेश सचिव मनोज आहूजा एडवोकेट ने राजस्थान के पुलिस महानिदेशक को पत्र भेजकर उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। अधिवक्ता आहूजा के अनुसार उदयपुर जिले के खेरोदा थाना क्षेत्र में दर्ज एफआईआर संख्या 130/2026 (धारा 281, 106(1) बीएनएस) के अनुसंधान अधिकारी सहायक उप निरीक्षक अशोक कुमार पर पीड़ित पक्ष ने यह आरोप लगाया है। शिकायत के अनुसार रिपोर्ट दर्ज होने के बाद से ही अनुसंधान अधिकारी द्वारा एक विशिष्ट वकील से फोन पर बात करवाकर उसी से क्लेम केस दायर करवाने का कथित दबाव बनाया जा रहा था। मना करने पर जांच व क्लेम प्रभावित करने की बातें कही गईं।

डीजीपी से की प्रमुख मांगें: एडवोकेट मनोज आहूजा ने पत्र में बताया कि पुलिस का कार्य निष्पक्ष व स्वतंत्र अनुसंधान करना है, न कि पक्षकार पर वकील थोपना। अपना अधिवक्ता चुनना पक्षकार का मौलिक अधिकार है। उन्होंने पत्र के माध्यम से मांग की है कि प्रकरण की किसी वरिष्ठ अधिकारी से निष्पक्ष जांच कराई जाए। निष्पक्षता बनाए रखने के लिए वर्तमान अनुसंधान अधिकारी को तत्काल बदला जाए। पीड़ित परिवार व गवाहों को सुरक्षा प्रदान की जाए तथा पुलिस विभाग द्वारा स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं ताकि कोई अधिकारी किसी पक्षकार पर वकील चयन के लिए दबाव न बना सके। उन्होंने इस पत्र की प्रतिलिपि बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन, महानिरीक्षक पुलिस (उदयपुर रेंज) तथा पुलिस अधीक्षक (उदयपुर) को भी आवश्यक कार्रवाई के लिए प्रेषित की है।

