हैदराबाद (तेलंगाना), 08 अगस्त (आदित्य न्यूज नेटवर्क): खरतरगच्छाधिपति आचार्य भगवंत श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी म.सा. ने कहा कि जीवन में उठने वाले सवालों के जवाब केवल जानकारी तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि वे हमारे जीवन का हिस्सा बनने चाहिए। जिज्ञासाएं केवल संतुष्टि तक सीमित न रहकर जीवन में परिवर्तनकारी स्थिति का निर्माण करें, तभी उनका वास्तविक लाभ है। वे श्री संघ शास्ता वर्षावास के अंतर्गत त्रयनगर स्थित श्री जैन श्वेताम्बर जिनकुशलसूरिजी दादाजी बाग मंदिर कारवान दादाबाड़ी में आयोजित धार्मिक सभा में जीवन से जुड़े विविध आध्यात्मिक एवं धार्मिक प्रश्नों का समाधान करते हुए बोल रहे थे।
पूजा के वस्त्रों में सामायिक संभव: पूजा के वस्त्रों में सामायिक करने संबंधी प्रश्न पर गुरुदेव ने कहा कि पूजा के वस्त्र पवित्र माने जाते हैं। परमात्मा के स्पर्श के समय मन, तन, भाव, वस्त्र व उपकरणों की शुद्धि आवश्यक है। इनमें मूल आधार भावशुद्धि है और पूजा के वस्त्र इसमें निमित्त बनते हैं। सावधानी रखते हुए कि वस्त्र अपवित्र न हों, पूजा के वस्त्रों में सामायिक की जा सकती है।
परंपरा व मूल वाणी का सम्मान: महिलाएं ‘नमो सिद्धाचार्योपाध्याय सर्वसाधुभ्यः’ क्यों नहीं बोलतीं—इस पर उन्होंने स्पष्ट किया कि यह एक परंपरा है। इस दौरान आचार्य सिद्धसेन दिवाकर का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने बताया कि नवकार महामंत्र के पदों के संस्कृत रूपांतरण पर गुरु ने इसे मूल वाणी की आशातना माना था। सिद्धसेन दिवाकर ने गुरु की आज्ञा शिरोधार्य कर 12 वर्ष के प्रायश्चित को सहजता व विनयपूर्वक स्वीकार किया था।

अभिग्रह का अर्थ दृढ़ संकल्प: सामायिक की विधि पर उन्होंने बताया कि मूल सूत्र समान हैं, केवल परंपराओं के अनुसार विधि-विधान में अंतर है। खरतरगच्छ में तीन बार व तपागच्छ में एक बार ‘करेमि भंते’ बोला जाता है। अभिग्रह को परिभाषित करते हुए गुरुदेव ने कहा कि अभिग्रह का अर्थ बिना किसी समझौते का दृढ़ संकल्प है। भगवान महावीर ने तेरह बोल का अभिग्रह लिया था और एक बात पूर्ण न होने तक समझौता नहीं किया। हमें भी धर्म में समझौते से बचना चाहिए।
युवाओं व बच्चों के लिए विशेष आयोजन: प्रवचन के अंत में मुनि विरक्तप्रभसागर महाराज ने आगामी रविवार के कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि “Gen Z — The Art of Unplugging: Finding Inner Peace Beyond the Screen” विषय पर विशेष प्रवचन होगा। इसके अलावा बच्चों के लिए अष्टप्रकारी पूजा प्रशिक्षण व बाल संस्कार शिविर तथा 13 से 28 वर्ष के युवाओं के लिए “भक्ति सरगम” प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी।

