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संयम का भाव बनते ही उसे शीघ्र ग्रहण करें, समय बीतने पर वापस नहीं मिलता: आर्यिका सुरम्यमति माताजी

केकड़ी, 11 अगस्त (आदित्य न्यूज नेटवर्क): आचार्य सुंदर सागर महाराज की सुशिष्या आर्यिका सुरम्यमति माताजी ने कहा कि मनुष्य अक्सर अच्छे कार्यों को कल पर टाल देता है और बुरे कार्यों को तुरंत करने लगता है। उन्होंने हमेशा हित, मित व प्रिय वचन बोलने की प्रेरणा दी ताकि सामने वाला भी प्रसन्न रहे। उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे विचारों से पूरे जीवन में बड़ा परिवर्तन लाया जा सकता है। इंसान को हमेशा यह चिंतन जरूर करना चाहिए कि वह कहां से आया है और कहां जाना है। वे बोहरा कॉलोनी स्थित नेमीनाथ मंदिर में प्रवचन कर रही थी। उन्होंने कहा कि धन एक ऐसी चीज है जो परिवार में राग-द्वेष, मन-मुटाव व वैमनस्यता पैदा कर देती है। भावना तो बनती है लेकिन कर्मोदय के कारण सद्भावना नहीं बन पाती।

केकड़ी: दीप प्रज्जवलन करते लाभार्थी परिवार के सदस्य।

समय का करें सदुपयोग: धर्मोपदेश में माताजी ने कहा कि यदि संयम का भाव बनता है तो उसे शीघ्र ग्रहण करना चाहिए, क्योंकि अनंत पुण्य से ही मनुष्य भव प्राप्त होता है। यदि धन चला जाए तो पुरुषार्थ से पुनः अर्जित किया जा सकता है, लेकिन समय बीत जाने पर वापस नहीं मिलता। इसलिए हमेशा सही समय का ध्यान रखें व सदुपयोग करें। चरित्र मानव धर्म की सबसे बड़ी पूंजी है, शरीर के रहते आत्मा का धन जमा कर लेना चाहिए जो समय पर काम आए। मीडिया प्रभारी रमेश बंसल ने बताया कि धर्मसभा से पहले प्रातःकाल में आर्यिका संघ के सानिध्य में जिनाभिषेक, शांतिधारा व नित्यपूजन-अर्चना सहित विभिन्न धार्मिक क्रियाएं संपन्न हुईं। संचालन बा.ब्र. कनक दीदी व पं. निकेत शास्त्री ने किया।

केकड़ी: नेमिनाथ मंदिर में आयोजित धर्मसभा में मौजूद महिला पुरूष।

ये बने सौभाग्यशाली: श्री नेमिनाथ भगवान का स्वर्ण कलशाभिषेक विमल कुमार, चेतन कुमार (बिसूंदनी परिवार) व शांतिधारा करने का सौभाग्य भागचंद, ज्ञानचंद, जैन कुमार, विनय कुमार, वर्धमान व सोनू-मोनू भगत (सावर परिवार) ने प्राप्त किया। कार्यक्रम के दौरान आचार्य श्री के चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन, पाद प्रक्षालन व शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य महावीर प्रसाद, पारस कुमार, विनोद कुमार व दशरथ जैन (पारा परिवार) को मिला। मध्याह्न में आर्यिका माताजी द्वारा गोम्मटसार जीव शास्त्र का स्वाध्याय व श्रद्धालुओं की जिज्ञासाओं का समाधान किया गया। सायंकाल में आरती, भक्ति संगीत व त्रिलोक सार ग्रंथ स्वाध्याय के साथ धर्म सभा आनंद यात्रा संपन्न हुई।

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