Friday, February 27, 2026
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सिद्धचक्र महामंडल विधान में भक्ति की बयार; श्रीफल अर्घ्य समर्पित कर की सुख-समृद्धि की कामना

केकड़ी, 26 फरवरी (आदित्य न्यूज नेटवर्क): गणाचार्य विराग सागर महाराज के शिष्य श्रमणोपाध्याय विकसंत सागर महामुनिराज ने कहा कि धर्म की जड़ पाताल तक होती है व धर्म ही जीव का वास्तविक हित करने वाला है। इसलिए श्रावकों को निरंतर धर्म क्रियाएं करते हुए अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए। वे बोहरा कॉलोनी स्थित नेमिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में अष्टानिका पर्व के अवसर पर आयोजित धर्म सभा में बोल रहे थे। उन्होंने श्रावकों के आवश्यक कर्तव्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देव-शास्त्र-गुरु की पूजा, उपासना, स्वाध्याय, संयम, तप व दान जैसी धार्मिक क्रियाएं प्रतिदिन करनी चाहिए। उन्होंने भगवान की अष्टद्रव्य से पूजन, निग्रंथ गुरु की सेवा, आहार दान, वैयावृत्ति व जिनवाणी वाचन को जीवन में उतारने की प्रेरणा दी। साथ ही कुल की मर्यादा का ध्यान रखने व धर्म प्रभावना में सदैव तत्पर रहने का आह्वान किया।

धार्मिक अनुष्ठानों की रही धूम: मीडिया प्रभारी पारस जैन व रमेश बंसल ने बताया कि अष्टानिका महापर्व के उपलक्ष्य में मंदिर में प्रातः काल: जिनाभिषेक, शांतिधारा व नित्य नियम पूजा आयोजित की गई। दोपहर में सिद्धचक्र महामंडल विधान का भव्य आयोजन हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव के साथ सिद्धों के 32 श्रीफल अर्घ्य समर्पित किए। सायंकाल आरती, भक्ति संगीत व शास्त्र स्वाध्याय के साथ आनंद यात्रा संपन्न हुई। समाज के अध्यक्ष ज्ञान चंद जैन (ज्वैलर्स) व मंत्री कैलाश जैन (मावा वाले) ने बताया कि वर्तमान में मुनिसंघ के साथ दो मुनि, एक क्षुल्लक व दो क्षुल्लिका माताजी नेमीनाथ जैन मंदिर में विराजित है। जिनके सानिध्य में धर्म की गंगा बह रही है। इस मौके पर बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।

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