केकड़ी, 28 दिसंबर (आदित्य न्यूज नेटवर्क): तपोभूमि प्रणेता दिगंबर जैन आचार्य प्रज्ञासागर महाराज ने कहा कि हम मिथ्यात्व (झूठे मार्ग) के कारण जन्म-मृत्यु के चक्र में फंसे रहते हैं। हमे अपने जीवन का कल्याण करना है, तो सम्यक्त्व की औषधि ग्रहण करनी होगी। वे यहां बोहरा कॉलोनी स्थित नेमीनाथ मंदिर में शीतकालीन प्रवास के अवसर पर प्रवचन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जो वस्तुएं कभी काम नहीं आई तथा भविष्य में भी काम आने की संभावना नहीं है, उनका त्याग करना चाहिए। ऐसे छोटे-छोटे नियमों को जीवन में उतारने से ही महान पुण्य का बंध होता है। उन्होंने कहा कि नियमों की लक्ष्मण रेखा पार करने वाला व्यक्ति कभी सुखी नहीं रह सकता।
भक्ति व श्रद्धा का संगम: धर्मसभा का शुभारंभ आचार्य पुष्पदंत सागर महाराज के चित्र अनावरण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ, जिसका सौभाग्य पदम चंद सेठी परिवार को प्राप्त हुआ। इसके बाद कैलाश चंद, प्रकाश चंद व पीयूष कुमार (मावा वाले) ने आचार्य श्री के पाद प्रक्षालन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर स्थानीय विधायक शत्रुघ्न गौतम ने भी आचार्य श्री के दर्शन कर मंगल आशीर्वाद लिया। मीडिया प्रभारी पारस जैन ने बताया कि धर्मसभा से पहले भक्तिमय माहौल में जिनाभिषेक, नित्यनियम पूजा व शांतिधारा संपन्न हुई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया।

