केकड़ी, 09 जनवरी (आदित्य न्यूज नेटवर्क): पंचतीर्थ प्रणेता आचार्य प्रज्ञा सागर महाराज ने कहा कि सांसारिक जीवन में हर व्यक्ति तन, मन व धन के सुख की कामना करता है, लेकिन सब कुछ होने के बावजूद मन तृष्णा (इच्छाओं) से भरा रहता है। संसार का नाम ही दुःख है तथा मोक्ष का नाम ही वास्तविक सुख है। वे नेमिनाथ मंदिर में गुरुवार शाम को आयोजित आध्यात्मिक आनंदयात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि दाम बिना निर्धन दुःखी, तृष्णावश धनवान। अर्थात निर्धन धन के अभाव में दुःखी है तथा धनवान अपनी असीमित इच्छाओं के कारण दुःखी है। जबकि वास्तविक सुख संतोष व मोक्ष मार्ग में ही निहित है। इस दौरान उपखंड अधिकारी दीपांशु सागवान ने आचार्य श्री के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस मौके पर एसडीएम ने आचार्य श्री से आगामी चातुर्मास केकड़ी में ही करने का विनम्र निवेदन करते हुए श्रीफल भेंट किया।

गुरु आस्था परिवार का गठन: आचार्यश्री के सानिध्य में गठित ‘गुरु आस्था परिवार‘ द्वारा शुक्रवार को प्रातःकालीन बेला में नवग्रह शांति हवन का आयोजन किया गया। इस दौरान गुरु आस्था परिवार की कार्यकारिणी गठित की गई। जिसमें सोनू अग्रवाल (जैन मशीनरी) को अध्यक्ष, जयेश रांटा को महामंत्री, गणेश जैन को कोषाध्यक्ष, संजय जैन बघेरा को उपाध्यक्ष, अतुल जैन बघेरा को सह मंत्री एवं अशोक सिंघल व भागचंद जैन धूंधरी को संरक्षक बनाया गया। प्रातःकाल आचार्यश्री के सानिध्य में नित्यनियम पूजा, जिनाभिषेक और शांतिधारा के धार्मिक अनुष्ठान भी संपन्न हुए।

मौसम ने दिया साथ, किया मंगल विहार: नेमिनाथ मंदिर अध्यक्ष ज्ञानचंद जैन ज्वैलर्स एवं मंत्री कैलाश चंद जैन मावा वालों ने बताया कि आचार्यश्री का विहार पूर्व में बघेरा व टोडारायसिंह की ओर तय था, लेकिन कड़ाके की शीतलहर के कारण स्थानीय समाज व विधायक शत्रुघ्न गौतम के आग्रह पर विहार स्थगित किया गया था। मीडिया प्रभारी पारस जैन ने बताया कि शुक्रवार को मौसम खुलते ही दोपहर में आचार्यश्री का केकड़ी से जूनिया के लिए मंगल विहार हुआ। पूरे जैन समाज ने गाजे-बाजे के साथ भव्य जुलूस निकालकर आचार्यश्री को भावभीनी विदाई दी।

