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नारी शिक्षा की प्रथम ज्योति माता सावित्रीबाई फुले की 195वीं जयंती मनाई, वक्ता बोले– सावित्रीबाई फुले केवल इतिहास नहीं, भविष्य की प्रेरणा हैं

केकड़ी: सावित्रीबाई फुले की जयंती मनाते माली समाज के लोग।

केकड़ी, 03 जनवरी (आदित्य न्यूज नेटवर्क): माली समाज के तत्वावधान में शनिवार को देश की प्रथम महिला शिक्षिका व समाज सुधारिका माता सावित्रीबाई फुले की 195वीं जन्म जयंती श्रद्धा के साथ मनाई गई। इस अवसर पर समाज के प्रबुद्धजनों ने उनके चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की। कार्यक्रम का शुभारंभ समाज के संरक्षक गीलूराम करोड़ीवाल, पूर्व पार्षद धनराज कच्छावा व घीसालाल गढ़वाल ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नवयुवक मंडल अध्यक्ष हेमराज कच्छावा ने कहा कि माता सावित्रीबाई फुले भारत की सामाजिक चेतना को नई दिशा देने वाली नारी शिक्षा की प्रथम ज्योति थी। उन्होंने उस दौर में बेटियों की शिक्षा का बीड़ा उठाया जब समाज में इसे पाप समझा जाता था। घोर अपमान, तिरस्कार व सामाजिक संघर्षों के बावजूद उन्होंने ज्ञान को अपना संकल्प बनाया तथा रूढ़ियों को तोड़ा।

समाज के लिए प्रेरणापुंज: वक्ताओं ने सावित्रीबाई फुले के जीवन संघर्ष व समाज के प्रति उनके योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि उनका जीवन विधवाओं, बालिकाओं व वंचित वर्गों को अधिकार दिलाने के लिए समर्पित रहा। सावित्रीबाई फुले आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणापुंज हैं। उनका जीवन हमें सिखाता है कि केवल शिक्षा व जागरूकता के माध्यम से ही न्यायपूर्ण समाज की रचना संभव है। इस मौके पर बृज नारायण बीदा, कैलाश चंद झाड़ोलिया, राजेंद्र करोड़ीवाल, बाबूलाल सुईवाल, अशोक भाभीवल, रामवतार करोड़ीवाल, भंवरलाल अजमेरा, कैलाश चंद अजमेरा, लक्ष्मी नारायण बीदा, दीपू कच्छावा, रतनलाल अरेडिया, रामदेव परोता सहित समाज के अनेक जने मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में सभी ने माता सावित्रीबाई फुले के बताए मार्ग पर चलने व शिक्षा के प्रचार-प्रसार का संकल्प लिया।

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