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टैक्स की दोहरी मार के कारण दाल मिलों पर संकट के बादल, व्यापारियों ने की टैक्स कम करने की मांग, बोले— यही हाल रहे तो होंगे पलायन के लिए मजबूर

केकड़ी: जिला कलक्टर श्वेता चौहान को ज्ञापन सौंपते दाल मिल एसोसिएशन के पदाधिकारी।

केकड़ी, 20 सितंबर (आदित्य न्यूज नेटवर्क): केकड़ी दाल मिल एसोसिएशन के प्रतिनिधिमण्डल ने शुक्रवार को जिला कलक्टर श्वेता चौहान को ज्ञापन सौंपकर राजस्थान में दलहन पर मंडी शुल्क कम करने, कृषक कल्याण शुल्क समाप्त करने एवं राज्य के बाहर से आने वाले दलहन को मंडी टैक्स के दायरे से बाहर करने की मांग की है। ज्ञापन में बताया कि कृषक कल्याण शुल्क कांग्रेस सरकार ने कोरोना काल में लागू किया था, जब भाजपा ने इसका विरोध किा था। अब प्रदेश में भाजपा की सरकार है। इसलिए कृषक कल्याण शुल्क हटाया जाना चाहिए।

राजस्थान में सबसे ज्यादा मण्डी टैक्स इसी प्रकार राजस्थान में दलहन पर 1.60 प्रतिशत मंडी शुल्क एवं 0.50 प्रतिशत कृषक कल्याण नामक सेस वसूला जा रहा है। जबकि गुजरात में मंडी टैक्स 0.60 प्रतिशत व हरियाणा में 1 प्रतिशत लिया जाता है तथा पंजाब, दिल्ली और बिहार में कोई मण्डी टैक्स नहीं लिया जाता है। इसी तरह राजस्थान राज्य के बाहर से आने वाले दलहन उत्पाद को मंडी टैक्स से मुक्त किया जाए। क्योंकि उस पर पहले ही टैक्स लग चुका है। दोबारा टैक्स लगाना न्यायसंगत नहीं है।

दाल उत्पादन में पहले नम्बर पर है राजस्थान ज्ञापन में बताया कि टैक्स की दोहरी मार के कारण प्रदेश का दलहन आधारित उद्योग संकट में है। दाल मिलों पर ताले लगने की नौबत आ गई है। ज्यादातर व्यापारी अपने उद्योग को उन पडोसी राज्य में शिफ्ट करने पर विचार कर रहे है, जहां टैक्स कम है। ज्ञापन में बताया कि दलहन उत्पादन में मध्यप्रदेश भले ही राजस्थान से आगे हो। परन्तु दाल उत्पादन में राजस्थान देश में नम्बर वन पर है। राजस्थान में तीन हजार से ज्यादा दाल मिले है। जिनके माध्यम से हजारों लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला हुआ है।

दूसरे राज्य के व्यापारी उठा रहे है फायदा प्रदेश के व्यवसायियों को कच्चे माल की पूर्ति के लिए पडोसी राज्यों से मंडी शुल्क चुका कर माल खरीदना पड़ रहा है। फिर यहां आते ही फिर से मंडी टैक्स के साथ कृषि कल्याण टैक्स की मार है। इसका फायदा उठाकर दूसरे राज्य के लोग राजस्थान में दाल बेचकर मुनाफा कमा रहे है और प्रदेश का दलहन उद्योग अन्य राज्यों में पलायन के लिए मजबूर हो रहा है। दलहन उद्योग को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार को दलहन पर मंडी शुल्क कम करना चाहिए।

सरकार करे पहल इसी के साथ कृषक कल्याण शुल्क समाप्त करना चाहिए तथा बाहर से आने वाले दलहन को मंडी टैक्स के दायरे से बाहर करना चाहिए। इसके लिए सरकार को आगे आकर पहल करनी होगी। इस मौके पर महावीर मिल्स के मनीष कटारिया, केडीएम इण्डस्ट्रीज के हरिनारायण मंत्री, हेम इण्डस्ट्रीज के विनय बाकलीवाल, राजश्री इण्डस्ट्रीज के दिनेश काबरा, बरफीदेवी इण्डस्ट्रीज के पारस कुमार जैन, आर के इण्डस्ट्रीज के पार्थिक जैन, स्वराज ऑयल इण्डस्ट्रीज के गौरव जैन, अरावली इण्डस्ट्रीज के विनोद जैन एवं हरि ऑयल इण्डस्ट्रीज के अरूण मून्दड़ा मौजूद रहे।

 

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