केकड़ी, 26 जनवरी (आदित्य न्यूज नेटवर्क): संत निरंकारी सत्संग भवन पर अजमेर जोन स्तरीय इंग्लिश मीडियम समागम का आयोजन किया गया। गुरुग्राम से आई मुख्य वक्ता बहन मनीषा ढींगरा के पावन सानिध्य में आयोजित इस समागम में ब्रह्मज्ञान और भक्ति के महत्व पर प्रकाश डाला गया। समागम को संबोधित करते हुए बहन मनीषा ढींगरा ने हिंदी व अंग्रेजी भाषा के माध्यम से सारगर्भित विचार रखे। उन्होंने कहा कि यह मानव चोला जिस उद्देश्य के लिए मिला है, उसे समय रहते ब्रह्मज्ञान प्राप्त कर पूर्ण कर लेना चाहिए। शरीर की महत्ता केवल आत्मा के रहने तक ही है, उसके पश्चात यह नश्वर है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब हम अपने जीवन की डोर परमात्मा को सौंप देते हैं और उसे अंग-संग जानकर जीते हैं, तभी जीवन में वास्तविक सुख, शांति व प्यार का संचार होता है।

मानव मात्र में देखें परमात्मा का नूर: ढींगरा ने कहा कि ज्ञान की दृष्टि मिलने पर हमें हर इंसान में परमात्मा का नूर नजर आने लगता है। जिस प्रकार फूल अंत समय तक खुशबू बिखेरता है, उसी प्रकार ब्रह्मज्ञानी को भी संतोष व सहनशीलता के साथ जीवन जीना चाहिए। उन्होंने एक नूर के सिद्धांत को समझाते हुए कहा कि जाति-पाति के भेद से ऊपर उठकर सभी में एक ही ईश्वर का वास देखना ही सच्ची भक्ति है। तुलसीदास जी की चौपाई का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि संसारिक सुख पापी को भी मिल सकते हैं, लेकिन संतों का संग व हरि चर्चा अत्यंत दुर्लभ है। हमें स्वयं के अवगुणों को त्याग कर दूसरों के गुणों को अपनाना चाहिए, जिससे जीवन में नम्रता व सबर आ सके।

13 शाखाओं के बच्चों व वक्ताओं ने दी प्रस्तुतियां: इस विशेष इंग्लिश मीडियम समागम में अजमेर जोन की 16 में से 13 शाखाओं के सदस्यों ने भाग लिया। विभिन्न शाखाओं से आए बच्चों व वक्ताओं ने अंग्रेजी भाषा में गीत, विचार व कविताएं प्रस्तुत कीं, जिनकी संगत ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ सराहना की। कार्यक्रम के अंत में स्थानीय ब्रांच मुखी अशोक कुमार रंगवानी ने सभी आगंतुक संतों व अतिथियों का आभार व्यक्त किया।


