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लॉर्ड तिरुपति महाविद्यालय के 10 वर्ष पूर्ण: स्वर्णिम समारोह में गूंजी राजस्थानी संस्कृति, सांवरलाल व अंजली बने ‘स्टूडेंट ऑफ द ईयर’

केकड़ी: लॉर्ड तिरुपति महाविद्यालय में युगल नृत्य प्रस्तुत करते प्रतिभागी एवं समारोह में मौजूद छात्राएं।

केकड़ी, 23 दिसंबर (आदित्य न्यूज नेटवर्क): सावर रोड स्थित लॉर्ड तिरुपति महाविद्यालय में मंगलवार को महाविद्यालय की स्थापना के 10 वर्ष पूर्ण होने पर स्वर्णिम समारोह का आयोजन किया गया। इस दौरान विद्यार्थियों ने राजस्थानी संस्कृति से ओत-प्रोत लोक गीतों व नृत्यों की प्रस्तुति देकर उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। पश्चिमी धुनों पर आधारित गीतों की प्रस्तुति के दौरान पांडाल में उत्साह का माहौल बन गया। जोशीले संगीत व आधुनिक गानों पर विद्यार्थी खुद को थिरकने से नहीं रोक सके तथा जमकर नृत्य किया। विभिन्न प्रतियोगिताओं के आधार पर स्टूडेंट ऑफ द ईयर का चयन किया गया। इसमें छात्र वर्ग में सांवर लाल व छात्रा वर्ग में अंजली मेवाड़ा को स्टूडेंट ऑफ द ईयर के खिताब से नवाजा गया।

आगे बढ़ने के लिए किया प्रेरित: इस अवसर पर आरएएस परीक्षा में चयनित करण मेघवंशी मुख्य अतिथि एवं महाविद्यालय सचिव महेश उपाध्याय, केकड़ी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सीताराम कुमावत व एडवोकेट रामप्रसाद कुमावत विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. ज्ञान चन्द जांगिड़ ने की। मुख्य अतिथि करण मेघवंशी ने अपने उद्बोधन में राजस्थान प्रशासनिक सेवा में चयन तक की अपनी प्रेरणादायी यात्रा साझा की। उन्होंने विद्यार्थियों को लक्ष्य निर्धारण, अनुशासन व निरंतर परिश्रम को सफलता का मूल मंत्र बताते हुए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।

केकड़ी: लॉर्ड तिरुपति महाविद्यालय में एकल नृत्य प्रस्तुत करती छात्राएं।

उपलब्धियों पर डाला प्रकाश: प्राचार्य डॉ. ज्ञान चन्द जांगिड़ ने महाविद्यालय के 10 स्वर्णिम वर्षों की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह सफलता शिक्षकों के समर्पण, विद्यार्थियों की मेहनत, अभिभावकों के विश्वास व प्रबंधन समिति के मार्गदर्शन का प्रतिफल है। महाविद्यालय के मार्गदर्शक डॉ. आदित्य उदयवाल ने अपने उद्बोधन में सामाजिक सरोकार का परिचय देते हुए कक्षा 1 से 12 तक के 11 अनाथ बालिकाओं को प्रतिमाह नियमित छात्रवृत्ति प्रदान करने की घोषणा की। जिसे उपस्थित जनसमूह ने सराहनीय पहल बताया। संचालन रामप्रसाद कुमावत ने किया। अंत में अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम का समापन किया गया।

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