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मुनि संघ ने प्रान्हेड़ा के लिए किया मंगल विहार, पिच्छिका परिवर्तन के साथ हुआ मुनिवर के चातुर्मास का निष्ठापन

केकड़ी: पिच्छिका परिवर्तन समारोह में मंचासीन मुनि अनुपम सागर महाराज एवं मुनि यतीन्द्र सागर महाराज।

केकड़ी, 17 नवम्बर (आदित्य न्यूज नेटवर्क): दिगम्बर जैन मुनि अनुपम सागर महाराज ने कहा कि पिच्छिका परिवर्तन जीवन का परिवर्तन है और परिवर्तन प्रकृति का नियम है। अनुपम पद से जिसने अनुपम वाणी को प्राप्त कर लिया, वही आत्मा रूपी कल्याण को प्राप्त कर सकता है। वे रविवार को घण्टाघर चौराहे पर सकल दिगम्बर जैन समाज के तत्वावधान में आयोजित पिच्छिका परिवर्तन समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि जीवन में कितना खाया है यह महत्वपूर्ण नहीं है, महत्वपूर्ण यह है कि कितना पचा है। इसी प्रकार कितना चले है यह महत्वपूर्ण नहीं है, महत्वपूर्ण यह है कि कहां पहुंचे है। आज हर व्यक्ति अच्छा बनना तो चाहता है लेकिन उसके लिए सार्थक प्रयास नहीं करता।

संतो का सानिध्य जरूरी धर्मसभा में मुनि यतीन्द्र सागर ने कहा कि मां से ममता, पत्नी से प्रेम, भाई से आत्मीयता, मित्र से हमदर्दी व गुरू से आशीर्वाद मत मांगो, ये सब अपने आप मिलता है, इसके लिए समर्पण के सिवा कुछ भी करने की आवश्यकता नहीं है। भौतिकवादी युग में भक्त के बजाए भगवान से जुड़ने तथा पाप को भगाने व सौभाग्य को प्राप्त करने के लिए संतों का सानिध्य प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिए। संत का आशीर्वाद मिलने पर किसी भी बात की कमी नहीं रहती।

केकड़ी: पिच्छिका परिवर्तन समारोह में मौजूद महिलाएं।

बहाई भजनों की रसगंगा पिच्छिका परिवर्तन के साथ ही चातुर्मास का निष्ठापन हो गया। मुनि संघ को पिच्छिका भेंट करते समय पाण्डाल जयकारों से गूंज उठा। मीडिया प्रभारी रमेश जैन एवं दि​लीप जैन ने बताया कि समारोह के दौरान भजन गायकों ने सुमधुर भजनों की रसगंगा बहाई। शुरूआत में महिला मण्डल की सदस्याओं ने मंगलाचरण प्रस्तुत किया। समारोह में केकड़ी सहित विभिन्न जगहों से आए महिला-पुरूष शामिल हुए। पिच्छिका परिवर्तन समारोह सम्पन्न होने के साथ ही मुनि संघ ने प्रान्हेड़ा के लिए मंगल विहार कर दिया।

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