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प्रतिष्ठा की तृतीय वर्षगांठ पर मंदिर के शिखर पर चढ़ाई ध्वजा, शंखेश्वर पार्श्वनाथ भगवान के जयकारों से गूंजा मंदिर

केकड़ी: शंखेश्वर पार्श्वनाथ मंदिर के शिखर पर ध्वजा चढ़ाते लाभार्थी परिवार के सदस्य।

केकड़ी, 25 नवम्बर (आदित्य न्यूज नेटवर्क): श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ के तत्वावधान में यहां बघेरा रोड स्थित श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ मंदिर में मंगलवार को प्रतिष्ठा की तृतीय वर्षगांठ एवं श्री जिन कुशल सूरी दादाबाड़ी में प्रतिष्ठा के चौदह वर्ष पूर्ण होने पर ध्वजारोहण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। लाभार्थी परिवार के बोहरा कॉलोनी स्थित निवास स्थान से शोभायात्रा निकाली गई, जो अस्थल मोहल्ला स्थित शीतलनाथ मंदिर एवं सब्जी मंडी स्थित चन्द्रप्रभु मंदिर में दर्शन करने के बाद दादाबाड़ी पहुंची। शोभायात्रा में लाभार्थी परिवार के महिला-पुरुष ध्वजा एवं पूजन सामग्री शिरोधार्य किए चल रहे थे।

केकड़ी: शंखेश्वर पार्श्वनाथ मंदिर के शिखर पर ध्वजा चढ़ाते लाभार्थी परिवार के सदस्य।

भक्तिमय कार्यक्रम: शोभायात्रा के मंदिर परिसर पहुंचने के बाद झारड़ा जिला उज्जैन (म.प्र.) से आए विधिकारक पंकज नवलखा के निर्देशन में सत्रह भेदी पूजा कराई गई। भजन गायकों ने सुमधुर भजनों की रसगंगा बहाई। ध्वजा के लाभार्थी परिवारों ने ऊं पुण्याहं- ऊं पुण्याहं के साथ, भगवान शंखेश्वर पार्श्वनाथ व दादा गुरुदेव के जयकारों के साथ मंदिर के शिखर पर ध्वजा चढ़ाकर खुशहाली की कामना की। ध्वजारोहण कार्यक्रम के बाद शांति कलश एवं महाआरती की गई।

ध्वजा का विशिष्ट महत्व: कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पंकज नवलखा ने कहा कि वस्तु एवं पदार्थ जितने पुराने होते जाते हैं, उनका मूल्य उतना ही कम होता जाता है। लेकिन प्रभु की प्रतिमा जितनी प्राचीन होती है, वह उतनी ही चमत्कारी होती जाती है। परमात्मा की सेवा अर्चना से ही मुक्ति पद को प्राप्त किया जा सकता है। जिस प्रकार मनुष्य की शारीरिक संरचना में मुंह का विशिष्ट महत्व होता है, उसी प्रकार जिन मंदिर में शिखर एवं ध्वजा का विशिष्ट महत्व एवं स्थान होता है। ध्वजा मंदिर की प्रभावना को विकसित करती है। इससे आसपास के क्षेत्र में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है। शिखर एवं ध्वजा के दर्शन मात्र से ही जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति मिलती है।

केकड़ी: जुलूस के दौरान पूजन सामग्री लेकर चलते लाभार्थी परिवार के पुरुष।

पुण्यशाली लाभार्थी परिवार: संघ अध्यक्ष जितेंद्र सिंघवी ने बताया कि मूलनायक शंखेश्वर पार्श्वनाथ भगवान के शिखर पर ध्वजा चढ़ाने का लाभ पारसमल, राहुल कुमार, कपिल कुमार, गौरव कुमार सोनी परिवार; ताराचन्द, लाभचन्द, दीपक कुमार, अमित कुमार धूपिया परिवार एवं कुशलचन्द, शांतिलाल, दिनेश कुमार, विकास कुमार, विनीत कुमार चौरड़िया परिवार को मिला। इसी प्रकार भगवान मुनिसुव्रतनाथ स्वामी की ध्वजा का लाभ राजेन्द्र कुमार, दीपक कुमार, गौरव कुमार धूपिया परिवार व मनोज कुमार, आरव कुमार लोढ़ा परिवार, भगवान महावीर स्वामी की ध्वजा का लाभ पारस मल, सतीश कुमार मेड़तवाल परिवार ब्यावर एवं गौतम स्वामी की ध्वजा का लाभ छोटीबाई किस्तूरचन्द गोलछा परिवार चेन्नई को मिला।

केकड़ी: जुलूस के दौरान ध्वजा एवं पूजन सामग्री लेकर चलती महिलाएं।

अन्य पुण्यशाली लाभार्थी परिवार: इसी प्रकार दादा गुरुदेव की ध्वजा का लाभ सुशील कुमार, पवन कुमार, गौतम कुमार कर्णावट परिवार, नाकोड़ा भैरव की ध्वजा का लाभ शांतिलाल, विकास कुमार, विनीत कुमार चौरड़िया परिवार, पद्मावती माता की ध्वजा का लाभ विचक्षण महिला मण्डल चेन्नई, घंटाकर्ण महावीर की ध्वजा का लाभ पुखराज संचेती परिवार पारोली एवं भोमिया बाबा की ध्वजा का लाभ लालाबाई गिरधारीलाल कोचर परिवार चेन्नई-नागपुर ने प्राप्त किया। दादाबाड़ी के शिखर पर ध्वजा चढ़ाने का लाभ विनय कुमार मेड़तवाल परिवार को मिला।

ये रहे मौजूद: इस मौके पर उदयसिंह धम्माणी, राजेन्द्र धूपिया, सुरेन्द्र लोढ़ा, गौतम रूपावत, भंवरलाल मेड़तवाल, उमरावमल मेड़तवाल, सुभाष चन्द चौरड़िया, कुशल चन्द चौरड़िया, शांतिलाल चौरड़िया, नीरज लोढ़ा, अमित धूपिया, विनीत चौरड़िया, बंटी चौरड़िया, पारस मल सोनी, निहालचन्द मेड़तवाल, सुरेन्द्र सिंघवी, मांगीलाल ताथेड़, नवीन ताथेड़, छोटूलाल पाड़लेचा, लालचन्द ताथेड़, राहुल सोनी, कपिल सोनी, दीपक धूपिया, अभिनव सिंघवी समेत जैन समाज के अनेक श्रावक-श्राविकाएं मौजूद रहे। पूजन एवं ध्वजारोहण के बाद स्वामी वात्सल्य का आयोजन किया गया।

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