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स्कूल की बदहाली पर उगानखेड़ा के ग्रामीणों का फूटा आक्रोश, सरसड़ी में केकड़ी-ब्यावर मार्ग पर लगाया जाम, सड़क पर टेंट लगाकर किया प्रदर्शन

केकड़ी: सरसड़ी में केकड़ी-ब्यावर मार्ग पर लगा जाम।

केकड़ी, 12 जुलाई (आदित्य न्यूज नेटवर्क): केकड़ी क्षेत्र के उगानखेड़ा गांव में विकास कार्यों की अनदेखी से नाराज ग्रामीणों ने शनिवार को केकड़ी-ब्यावर मार्ग पर जाम लगाकर विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों की मुख्य मांगों में स्कूल का नया भवन निर्माण, गांव में सड़क निर्माण और पानी निकासी की उचित व्यवस्था शामिल है। आक्रोशित ग्रामीणों ने सरसड़ी में सड़क मार्ग पर झाड़ियां लगाकर अपना विरोध शुरू किया, जिसके बाद मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हो गया। सूचना मिलने पर नायब तहसीलदार भोपाल सिंह मीणा, एसीबीईओ विष्णु शर्मा व सदर थाना पुलिस का जाब्ता मौके पर पहुंचा। अधिकारियों ने ग्रामीणों से समझाइश का प्रयास किया, लेकिन ग्रामीण अपनी मांगों का स्थायी समाधान होने तक जाम हटाने को तैयार नहीं हुए।

केकड़ी: स्कूल भवन जिसमें 25 जून से बारिश का पानी भरा हुआ है।

दोनों ओर लगी वाहनों की कतारें: ग्रामीणों ने सड़क के बीचों-बीच टेंट लगाकर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है, जिससे मार्ग के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गई हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि आजादी के बाद से ही प्रशासनिक और राजनीतिक उपेक्षा के कारण गांव में कोई विकास नहीं हुआ है, जिससे उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में पिछले कई सालों से कोई सड़क नहीं बनी है। इसके कारण उन्हें घुटनों तक भरे पानी में से आवागमन करना पड़ता है।

खतरे के साए में नौनिहालों की पढ़ाई: गांव में आठवीं तक का स्कूल है, लेकिन 25 जून से ही स्कूल भवन में बारिश का पानी भरा हुआ है, जिसके चलते पिछले 15 दिनों से पढ़ाई ठप है। मजबूरन स्कूली बच्चे सड़क किनारे नीम के पेड़ के नीचे बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं। स्कूल भवन की हालत भी जर्जर है। कमरों की टूटी पट्टियों को लकड़ियों के सहारे रोका गया है, जिससे किसी भी वक्त बड़ा हादसा हो सकता है। ग्रामीण बताते हैं कि बच्चे हरदम खतरे के साए में पढ़ाई करते हैं।

केकड़ी: स्कूल भवन में भरे पानी में से निकलते ग्रामीण।

शिक्षक नदारद, गांव में भरा रहता है पानी: ग्रामीणों के अनुसार स्कूल में करीब आठ शिक्षक कार्यरत थे, लेकिन इसी सप्ताह चार शिक्षकों को काचरिया स्कूल में डेपुटेशन पर भेज दिया गया है। अब स्कूल में केवल चार शिक्षक ही बचे हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। गांव में पानी निकासी की उचित व्यवस्था न होने के कारण बारिश के दिनों में करीब तीन महीने तक पानी भरा रहता है। इन सभी समस्याओं को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा और उन्होंने अपनी मांगों के समाधान के लिए सड़क पर उतरकर प्रदर्शन शुरू कर दिया है।

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