केकड़ी, 19 सितंबर (आदित्य न्यूज नेटवर्क): नाबालिग बच्चियों से जुड़े यौन अपराध के दो अलग-अलग मामलों में अजमेर की पोक्सो कोर्ट संख्या-1 ने शुक्रवार को कड़ा फैसला सुनाते हुए दोनों आरोपियों को 10-10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। एक मामले में आरोपी ने घर से बाहर निकली नाबालिग का मुंह दबाकर उसे जबरन अपने मकान में ले जाकर दुष्कर्म किया था, जबकि दूसरे मामले में आरोपी ने 8 वर्षीय बच्ची को कुरकुरे का लालच देकर अपने साथ ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म का प्रयास किया था। विशिष्ट न्यायाधीश हेमंत सिंह ने दोनों प्रकरणों में फैसला सुनाते हुए आरोपियों पर कुल 33 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया। साथ ही पीड़िताओं को नियमानुसार प्रतिकर राशि दिलाने के लिए विधिक सेवा प्राधिकरण को निर्देश दिए। दोनों मामलों में अभियोजन पक्ष की ओर से विशिष्ट लोक अभियोजक प्रशान्त यादव ने पैरवी की।

केस-1 : मुंह दबाकर मकान में ले गया, फिर किया दुष्कर्म: केकड़ी के सदर थाना क्षेत्र में 3 दिसंबर 2024 को दर्ज मामले के अनुसार, परिवादी 2 दिसंबर को बैंड बजाने के लिए घर से बाहर गया था। घर पर उसकी बेटी और भतीजी मौजूद थीं। इसी दौरान दिन में नाबालिग भतीजी पेशाब करने के लिए घर से बाहर निकली। आरोप है कि आरोपी ने बच्ची का मुंह दबाया और उसे जबरन अपने मकान में ले गया, जहां उसके साथ दुष्कर्म किया। घटना के बाद बच्ची रोते हुए घर पहुंची और परिजनों को पूरी घटना बताई। इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 14 गवाहों के बयान और 33 दस्तावेज अदालत में पेश किए। पीड़िता और आरोपी के डीएनए सैंपल की रिपोर्ट भी साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत की गई। साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी मानते हुए 10 साल के कठोर कारावास और 10 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया। साथ ही पीड़िता को नियमानुसार प्रतिकर राशि दिलाने के निर्देश दिए।
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केस-2 : कुरकुरे का लालच देकर खेत में ले गया: दूसरा मामला तत्कालीन केकड़ी जिले के ग्रामीण थाना क्षेत्र का है, जिसमें 10 दिसंबर 2024 को रिपोर्ट दर्ज हुई थी। प्रकरण के अनुसार 8 वर्षीय बच्ची घर के बाहर खेल रही थी। इसी दौरान बाइक से आए आरोपी ने बच्ची से पेट्रोल पंप का रास्ता पूछा। इसके बाद रास्ता बताने के बदले उसे कुरकुरे दिलाने का लालच देकर अपने साथ ले गया। आरोप है कि आरोपी बच्ची को पेट्रोल पंप ले जाने के बजाय जंगल की ओर सरसों के खेत में ले गया और उसके साथ दुष्कर्म का प्रयास किया। इसी दौरान खेत मालिक कुएं के पास लाइट देखने पहुंचा। बच्ची की चीख सुनकर वह मौके पर पहुंचा और आरोपी को पकड़ लिया। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 12 गवाह और 21 दस्तावेज अदालत में पेश किए। साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी को पोक्सो एक्ट की संबंधित धाराओं में दोषी मानते हुए 10 साल के कठोर कारावास और 23 हजार रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई।
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कोर्ट ने कहा- मासूमों के खिलाफ अपराध में नरमी उचित नहीं: 8 वर्षीय बच्ची से जुड़े मामले में अदालत ने अपने फैसले में अपराध की गंभीरता को रेखांकित करते हुए कहा कि अबोध ग्रामीण बालिका के साथ लैंगिक आशय से छेड़छाड़, गुरुतर लैंगिक हमला करने का प्रयास तथा कुरकुरे का लालच देकर उसका व्यपहरण करने के अपराध प्रमाणित हुए हैं। अदालत ने कहा कि ऐसे अपराध करने वाले व्यक्ति के प्रति नरमी का रुख अपनाना न्यायोचित नहीं होगा। इससे समाज में ऐसे अपराधों के प्रति असंवेदनशीलता का प्रतिकूल संदेश जाता है। विधायिका ने भी ऐसे अपराधों की प्रकृति और समाज पर उनके प्रभाव को देखते हुए कठोर न्यूनतम दंड का प्रावधान किया है। अदालत ने पीड़िता की आयु और प्रकरण की समग्र परिस्थितियों को देखते हुए पोक्सो अधिनियम की मंशा तथा न्याय के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए आरोपी के प्रति किसी प्रकार की नरमी नहीं बरतते हुए समुचित दंड दिया जाना उचित माना।


