केकड़ी, 28 दिसंबर (आदित्य न्यूज नेटवर्क): केकड़ी को पुनः जिला बनाने की मांग को लेकर जिला बनाओ अभियान के तहत रविवार को अधिवक्ताओं ने अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। जिला हटाने की पहली बरसी के अवसर पर केकड़ी जिला बार एसोसिएशन के बैनर तले अधिवक्ताओं ने धरना प्रदर्शन किया व सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। धरना प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ता गणों ने सरकार की नीतियों पर तीखे प्रहार किए। वकीलों ने कहा कि एक ही पार्टी की सरकार दो अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग मापदंड अपना रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जहां एक ओर राजस्थान में नवगठित जिलों को ‘दुष्परिणाम’ बताकर हटा दिया गया, वहीं दूसरी ओर दिल्ली में आमजन को ‘माइक्रो लेवल’ पर सुगम प्रशासन देने के नाम पर तीन नए जिले बनाए गए हैं। अधिवक्ताओं ने इसे सरकार का ‘दोहरा चरित्र’ करार दिया।

अवकाश के बावजूद दिया धरना: माह का अंतिम रविवार होने के कारण अदालतों में अवकाश था, इसके बावजूद बड़ी संख्या में अधिवक्ता धरने पर मौजूद रहे। उन्होंने जिला हटाने के फैसले को केकड़ी की जनता के साथ अन्याय बताते हुए इस दिन को ‘बरसी’ के रूप में मनाया। बार एसोसिएशन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि केकड़ी को पुनः जिला घोषित नहीं किया गया, तो आने वाले समय में इस आंदोलन को और भी बड़े स्तर पर ले जाया जाएगा। अधिवक्ताओं ने इस दौरान एकजुट होकर मांग पूरी होने तक संघर्ष जारी रखने का सामूहिक संकल्प लिया। इस अवसर पर अधिवक्ता लक्ष्मी चंद मीणा, रवि शंकर पवार, रामेश्वर प्रसाद कुमावत, आदिल कुरेशी, आदित्य भान सिंह राठौड़, रविंद्र मेवाड़ा, सुनील कुमार जैन, मुंशी राधेश्याम कुमावत, टाइपिस्ट मोनू शर्मा, प्रहलाद वर्मा, रोहिंदर सिंह चौहान सहित कई अधिवक्ता व न्यायिक कर्मचारी मौजूद रहे।


