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चारभुजा नाथ मंदिर में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की धूम, भागवत कथा में दिव्य प्रसंग सुन भावविभोर हुए श्रोता

केकड़ी, 16 मई (आदित्य न्यूज नेटवर्क): पुरानी केकड़ी स्थित प्राचीन चारभुजानाथ मंदिर में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव के चौथे दिन भक्ति, अध्यात्म व भावनाओं का अनुपम संगम देखने को मिला। कथा व्यास पंडित बुद्धिप्रकाश दाधीच ने समुद्र मंथन, वामन अवतार, भगवान श्रीराम जन्म व श्रीकृष्ण जन्मोत्सव जैसे दिव्य प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। श्रीकृष्ण जन्म के अलौकिक प्रसंग के दौरान पूरा मंदिर परिसर “जय कन्हैया लाल की” के जयघोष, शंखनाद व पुष्पवर्षा से गुंजायमान हो उठा। इस दौरान महिलाओं ने मंगल गीत गाए व श्रद्धालुओं ने भजनों पर जमकर नृत्य किया। व्यास पीठ से पंडित दाधीच ने समुद्र मंथन के गूढ़ रहस्य को समझाते हुए कहा कि यह मनुष्य के भीतर चलने वाले निरंतर संघर्ष का प्रतीक है। जीवन में सफलता रूपी अमृत पाने से पहले हर व्यक्ति को विष रूपी कठिनाइयों से गुजरना ही पड़ता है। उन्होंने वामन अवतार व श्रीराम जन्म प्रसंग पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भगवान का अवतार संसार को मर्यादा, त्याग व धर्म का मार्ग दिखाने के लिए होता है। राजा बलि के दान व भगवान वामन के विराट स्वरूप के वर्णन पर पूरा पांडाल जयकारों से गूंज उठा।

सुमधुर भजनों पर झूमे श्रद्धालु: मुख्य प्रसंग की व्याख्या करते हुए कथा व्यास दाधीच ने कहा कि समय परिवर्तन से पहले अपने संकेत अवश्य देता है, श्रीकृष्ण जन्म उसी दिव्य परिवर्तन का प्रतीक है। जब अत्याचार अपनी सीमा पार कर देता है, तब ईश्वर स्वयं अवतार लेते हैं। कंस को किसी बालक से नहीं बल्कि उस धर्म से भय था जो जन्म लेने वाला था। उन्होंने आधी रात को रोहिणी नक्षत्र में कारागार में हुए श्रीहरि के प्राकट्य का अत्यंत भावपूर्ण चित्रण किया। महोत्सव में बृजेश दाधीच, पवन कुमावत व कालू सूपा ने भजनों की मधुर प्रस्तुतियां दीं। इस अवसर पर नगर पंडित व मंदिर के कथा व्यास पंडित मुरलीधर दाधीच का साफा बांधकर सम्मान किया गया। नित्य पूजन व धार्मिक अनुष्ठान पंडित मुरलीधर शास्त्री के सानिध्य में संपन्न हुए। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का यह विशेष आयोजन पुण्यार्जक नांदसी के चतुर्भुज सोनी, कृष्ण गोपाल सोनी व जेपी सोनी परिवार द्वारा करवाया गया, जिन्होंने उपवास रखकर श्रद्धापूर्वक इस महोत्सव का पुण्य लाभ अर्जित किया।

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