केकड़ी, 16 मई (आदित्य न्यूज नेटवर्क): नागोला कस्बे के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में शनिवार को ‘एनीमिया मुक्त भारत‘ अभियान के तहत बच्चों को आयरन की गोलियां देना उस समय भारी पड़ गया, जब भूखे पेट गोली खाने से एक दर्जन से अधिक छात्र-छात्राओं की तबीयत अचानक बिगड़ गई। बच्चों को पेट दर्द, सिर दर्द व उल्टी की शिकायत होने पर स्कूल स्टाफ में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में सभी बीमार बच्चों को स्थानीय राजकीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां त्वरित प्राथमिक उपचार के बाद हालत सामान्य होने पर उन्हें छुट्टी दे दी गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार विद्यालय में शनिवार को योजना के तहत कक्षा 6 से 8 तक के विद्यार्थियों को आयरन व फोलिक एसिड की गोलियां खिलाई गई थी। जो बच्चे घर से भोजन करके आए थे, उन्हें किसी प्रकार की समस्या नहीं हुई। इसके विपरीत जो बच्चे घर से खाली पेट आए थे, उन्हें आयरन की 250 एमजी की गोली देते ही कुछ ही देर में उनके पेट व सिर में तेज दर्द शुरू हो गया और उल्टियां होने लगी।

विभाग ने साइड इफेक्ट से किया इनकार: विद्यालय प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए सभी पीड़ित बच्चों को तुरंत अस्पताल में भर्ती करवाया, जहां चिकित्सा स्टाफ ने मुस्तैदी से उपचार शुरू किया। करीब आधे घंटे बाद बच्चों की स्थिति में सुधार होने पर उन्हें घर भेज दिया गया। चिकित्सा विभाग के अनुसार शरीर में रक्ताल्पता (खून की कमी) व विटामिन की कमी को दूर करने के लिए यह गोली दी जाती है, जिसका कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है। जांच में सामने आया कि केवल भूखे पेट गोली के सेवन व अत्यधिक गर्मी के प्रभाव के कारण ही बच्चों की तबीयत खराब हुई थी। गौरतलब है कि स्वास्थ्य व शिक्षा विभाग द्वारा चलाए जा रहे इस अभियान के तहत सभी सरकारी व निजी विद्यालयों में 5 से 19 वर्ष के छात्र-छात्राओं को एनीमिया से बचाने के लिए नियमित रूप से यह गोलियां खिलाने के कड़े निर्देश है।

इनका क्या कहना है: राजकीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नागोला के चिकित्सक डॉ. नितेश सैनी ने बताया कि आयरन की गोली के सेवन से किसी प्रकार का कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है। स्कूल के छोटे बच्चों को भूखे पेट आयरन की गोलियां दी गई थी व अत्यधिक गर्मी होने के कारण उन्हें पेट दर्द और उल्टी की शिकायत हुई। सभी बच्चों का प्राथमिक उपचार करके सुरक्षित छुट्टी दे दी गई है। वहीं राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय नागोला की प्रधानाचार्या रचना गौड़ का कहना रहा कि पोषाहार को सबसे पहले स्टाफ व मैं खुद चखने के बाद ही बच्चों को खिलाती हूं। कुछ बच्चे भूखे पेट आयरन की गोली खाने तथा अत्यधिक गर्मी होने के कारण अस्वस्थ हो गए थे। उन्हें तुरंत चिकित्सालय लेकर गए, जहां प्राथमिक उपचार के बाद सभी को छुट्टी दे दी गई।


