केकड़ी, 26 जून (आदित्य न्यूज नेटवर्क): राष्ट्र संत गणाचार्य विराग सागर महाराज के सुशिष्य आचार्य विनिश्चय सागर महाराज का 53 वां अवतरण दिवस मुनि प्रज्ञान सागर महाराज एवं प्रसिद्ध सागर महाराज के सानिध्य में नेमिनाथ मंदिर में धूमधाम व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। प्रातः काल से ही मंदिर जी में धार्मिक अनुष्ठानों की धूम रही, जहां मुनि ससंघ के सानिध्य में जिनाभिषेक, शांति धारा व जिनेंद्र अर्चना के मांगलिक प्रसंग संपन्न हुए। अवतरण दिवस के मुख्य कार्यक्रम में सकल दिगंबर जैन समाज के श्रावक-श्राविकाओं सहित शांतिनाथ बहु मंडल, विशुद्ध वर्धनी महिला मंडल, राजुल महिला मंडल व ऋषभनाथ जिनालय सहित अन्य जिन मंदिरों के श्रावकों ने अष्ट द्रव्यों से देव-शास्त्र-गुरु की भक्तिभाव पूर्वक पूजन कर अर्घ्य समर्पित किए।

गुरुदेव ने निर्जीव पत्थर को तराशकर दी जिन मुद्रा: धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि प्रज्ञान सागर महाराज ने अपनी विनयांजलि में कहा कि जिस तरह एक कुशल मूर्तिकार साधारण पत्थर को तराशकर भगवान का रूप दे देता है, ठीक उसी प्रकार पूज्य गुरुदेव का हमारे ऊपर असीम एहसान व विशाल कृपा है। उन्होंने हमें निर्जीव पत्थर के समान तराशकर एक पवित्र जिन मुद्रा दिगंबर मुनि का रूप दिया है। यह किसी व्यक्ति का नहीं, बल्कि उनके महान व्यक्तित्व का फल है। मुनि प्रसिद्ध सागर महाराज ने कहा कि गुरुदेव का जन्म हम जैसे साधारण मनुष्यों का जीवन सुधारने के लिए ही हुआ है। वे जिन शासन की महान प्रभावना करते हुए भगवान महावीर स्वामी के जिन सूत्रों को जन-जन तक पहुंचाने का भगीरथ कार्य कर रहे हैं। इन जिन सूत्रों को जीवन में आत्मसात करके ही हम सभी कष्टों, दुखों व पीड़ा का शमन कर शांतिपूर्ण जीवन प्राप्त कर सकते हैं।

विद्वानों का हुआ “वाकेश्वरी पुरस्कार” से सम्मान: मीडिया प्रभारी पारस जैन व रमेश बंसल ने बताया कि आचार्य श्री के अवतरण दिवस के पावन प्रसंग पर सकल दिगंबर जैन समाज द्वारा जिन शासन के गौरव व ललितपुर से पधारे विद्वान डॉ. शीतल चंद्र जैन, जयपुर के प्रतिष्ठाचार्य पंडित विमल कुमार जैन व बम्बोरी के पंडित अंकित शास्त्री को “वाकेश्वरी पुरस्कार” से तिलक, साफा व प्रशस्ति पत्र भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के दौरान मुनि संघ के पाद प्रक्षालन का सौभाग्य भागचंद विजय कुमार जैन परिवार व भागचंद ज्ञानचंद सुनील कुमार जैन ज्वैलर्स परिवार ने प्राप्त किया। वहीं मुनि श्री को शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य शांतिलाल, पारस कुमार, विनोद कुमार व राकेश कुमार परिवार को मिला। संचालन पंडित निकेत शास्त्री ने किया।


