केकड़ी, 02 जुलाई (आदित्य न्यूज नेटवर्क): रामस्नेही संप्रदाय के पीठाधीश्वर जगद्गुरु आचार्य स्वामी रामदयाल महाराज के गुरुवार को केकड़ी आगमन पर ऐतिहासिक कलश व भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा के बाद आचार्यश्री ने लगभग ढाई शताब्दी पुराने रामद्वारा के स्थान पर डेढ़ करोड़ रुपए की लागत से निर्मित नवीन एवं भव्य रामद्वारा भवन का विधि-विधान से उद्घाटन किया। इस धार्मिक उत्सव से पूरा शहर राममय नजर आया। शोभायात्रा में दो विशेष रथ शामिल थे। एक रथ में आचार्य स्वामी रामचरण जी महाराज की तस्वीर व पवित्र ग्रंथ ‘वाणी जी‘ विराजमान थे, वहीं दूसरे रथ में पीठाधीश्वर आचार्य रामदयाल महाराज संतों के साथ विराजमान थे।

1100 महिलाओं ने धारण किए मंगल कलश: शोभायात्रा नगर पालिका परिसर (बिजासन माता) से आरंभ होकर राजपथ, तीनबत्ती चौराहा, जयपुर रोड, जूनिया गेट, घंटाघर, सदर बाजार, खिड़की गेट, लोढ़ा चौक, चारभुजा मंदिर, माणक चौक होते हुए सूरजपोल गेट स्थित रामद्वारा पहुंची। यात्रा के आगे 11 अश्वों पर सवार श्रद्धालु धर्म ध्वज थामे चल रहे थे। इसके पीछे बैंड-बाजे की सुमधुर धुन पर नृत्य करती महिलाओं व मंगल गीत गाती 1100 कलशधारी महिलाओं का वैभव देखते ही बन रहा था।

विधायक गौतम ने लिया आशीर्वाद: विधायक शत्रुघ्न गौतम ने भी जुलूस में शामिल होकर आचार्य श्री से आशीर्वाद लिया। जुलूस के दौरान नगर के मुख्य मार्गों पर बढ़ते कदम गौशाला संस्थान, लायंस क्लब, बार एसोसिएशन व विभिन्न समाजों खटीक, मेवाड़ा, माहेश्वरी, पारीक, सिंधी, विजयवर्गीय, दक्ष प्रजापति, रावणा राजपूत, सकल ब्राह्मण, जांगिड़, वाल्मीकि, रैगर, बैरवा, माली, तेली साहू, वैष्णव समाज और भारत विकास परिषद द्वारा स्वागत द्वार बनाकर पुष्पवर्षा की गई। श्रद्धालुओं ने जगह-जगह आचार्य श्री की आरती उतारी व भक्तों के लिए पानी-शरबत की व्यवस्था की।

सदाचार और पुरुषार्थ से जागता है भाग्य: रामद्वारा पहुंचने पर भक्तों ने जयघोष के साथ संतों की अगवानी की। आचार्य रामदयाल महाराज ने फीता काटकर नवनिर्मित भवन का उद्घाटन किया व वाणी जी ग्रंथ की स्थापना कर पूजा-अर्चना की। इसके बाद आयोजित विशाल सत्संग सभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री ने कहा कि मनुष्य को अपने कर्म, सेवा, सत्संग व प्रभु भक्ति के माध्यम से अपना भाग्य स्वयं जगाना चाहिए। भाग्य तभी जागृत होता है जब जीवन में पुरुषार्थ, सदाचार और ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास हो।

केकड़ी की टीम व संत जगबल्लभराम महाराज की सराहना: आचार्य श्री ने संत जगबल्लभराम महाराज के मार्गदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में देशभर में सैकड़ों रामद्वारों का निर्माण हुआ है और उनकी ही दूरदर्शी सोच से इस रामद्वारा का पुनर्निर्माण संभव हो सका है। उन्होंने केकड़ी के कार्यकर्ताओं की मुक्तकंठ से प्रशंसा करते हुए कहा कि समर्पित और संगठित टीम हो तो कठिन कार्य भी अनुशासित ढंग से संपन्न हो जाता है। केकड़ी की टीम संगठन व सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण है।

108 थालों से हुई महाआरती: कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रामद्वारा में आयोजित महाआरती रही, जहां महिला-पुरुषों ने 108 थालों से आचार्य श्री की उपस्थिति में आरती की, जिससे पूरा परिसर अलौकिक आभा से भर उठा। दिनभर धार्मिक अनुष्ठान, संतवाणी व सत्संग का दौर चलता रहा, जिसमें बड़ी संख्या में संत-महात्मा, श्रद्धालु व गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।


