पाली (नीरज लोढ़ा), 13 जुलाई (आदित्य न्यूज नेटवर्क): भौतिक चकाचौंध व सुख-सुविधाओं से भरी जिंदगी को छोड़कर आत्म-कल्याण के मार्ग पर बढ़ना हर किसी के बस की बात नहीं होती। वर्तमान दौर में जहां युवा करोड़ों के पैकेज व कॉर्पोरेट करियर का सपना देखते हैं, वहीं एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने इस सब से मुंह मोड़कर संयम पथ को चुना है। ब्यावर हाल पाली निवासी पुष्पा व प्रदीप श्रीश्रीमाल के सुपुत्र शुभम श्रीश्रीमाल (30 वर्ष) आगामी 50 दिनों के बाद मुनि जीवन अंगीकार करने जा रहे हैं। माता-पिता के संस्कारों व उनकी प्रेरणा को जीवन का सबसे बड़ा उपकार मानने वाले शुभम 4 सितंबर 2026 को जैन आचार्य श्री रामलाल महाराज व उपाध्याय श्री राजेश मुनि के पावन सानिध्य में बीकानेर में जैन भागवती दीक्षा ग्रहण करेंगे। शुभम अल्प आयु में ही सांसारिक मोहमाया के भंवरजाल से निकल कर संयम पथ पर आगे बढ़ेंगे।

करोड़ों के पैकेज व भौतिक वैभव पर भारी पड़ी गुरुवाणी: 18 सितंबर 1995 को जन्मे शुभम श्रीश्रीमाल के पास वह सब कुछ था, जो एक सफल जीवन के लिए जरूरी माना जाता है। प्रारंभिक शिक्षा पाली में होने के बाद वे 2011 में पढ़ाई करने कोटा चले गए। इसके बाद उन्होंने 2014 से 2018 तक पटियाला से इंजीनियरिंग की डिग्री ली। पढ़ाई पूरी होते ही बेंगलुरु की एक मल्टी नेशनल कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के पद पर उनका चयन हो गया, जहां उनका सालाना पैकेज 40 लाख रुपए था। इस भारी-भरकम पैकेज व कॉर्पोरेट लाइफस्टाइल के बीच भी शुभम का मन हमेशा धर्म, ध्यान व साधना में रमता था। उनका मानना था कि इस नश्वर संसार में भौतिक संपदा स्थाई सुख नहीं दे सकती।

शिविर से बदला जीवन, संसार को माना असार: शुभम के जीवन में असली यू-टर्न जून 2025 में आया, जब उन्होंने जैन आचार्य श्री रामलाल महाराज के सानिध्य में आयोजित ‘उन्नयन शिविर‘ में भाग लिया। शिविर के दौरान गुरुदेव के प्रवचनों ने उनके भीतर वैराग्य का बीज बो दिया। उन्हें संसार की असारता का बोध हुआ व वे आत्म-चिंतन में लीन रहने लगे। इसी आत्म-कल्याण की तड़प के चलते उन्होंने जीवन भर शादी न करने का फैसला लेते हुए शील व्रत अंगीकार कर लिया। आखिरकार अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए उन्होंने गत दिनों कंपनी से इस्तीफा दे दिया।

शुरुआत में परिवार ने किया विरोध, दृढ़ता देख झुके माता-पिता: शुभम के बड़े भाई अंकित श्रीश्रीमाल ने बताया कि एक माता-पिता के लिए अपने युवा व सफल बेटे को इस तरह विदा करना बेहद कठिन था। शुरुआत में परिवार ने दीक्षा की अनुमति नहीं दी। लेकिन समय के साथ शुभम के भीतर वैराग्य की भावना और अधिक दृढ़ होती गई। बेटे की अटूट श्रद्धा व दृढ़ संकल्प के आगे आखिरकार परिवार को झुकना पड़ा। माता-पिता ने भारी मन व अपार गर्व के साथ गत 9 जुलाई 2026 को आचार्य श्री रामलाल जी म.सा. के समक्ष दीक्षा का आज्ञा पत्र समर्पित कर दिया। शुभम की तीव्र वैराग्य भावना को देखते हुए गुरुदेव ने 4 सितंबर 2026 को दीक्षा का मुहूर्त प्रदान किया।

गुरुदेव की कृपा से मिला संयम पथ पर आरूढ़ होने का अवसर: दीक्षा की तैयारियों के बीच शुभम ने बताया कि भौतिक सुख-सुविधाओं और सॉफ्टवेयर इंजीनियर के बड़े पद पर होने के बाद भी उनका मन कभी इन सांसारिक चीजों में नहीं रमा। वे कॉर्पोरेट जगत की चकाचौंध के बीच भी लगातार धर्म, तप, त्याग व तपस्या में रमे रहते थे और आत्म-कल्याण की राह तलाशते थे। उन्होंने कहा कि इस दुर्लभ मानव जीवन में पूर्व जन्म के उत्कृष्ट संस्कारों और गुरुदेव की असीम कृपा के कारण ही उन्हें सांसारिक मोहमाया के भंवरजाल से मुक्त होकर संयम पथ पर आरूढ़ होने का यह पावन अवसर प्राप्त हुआ है। यह उनके और पूरे परिवार के लिए अत्यंत गौरव व सौभाग्य का क्षण है कि वे जैन भागवती दीक्षा अंगीकार कर मुनि बनने जा रहे हैं, जहां वे पूरी प्रखरता के साथ आत्म-साधना के मार्ग पर आगे बढ़ेंगे।

