केकड़ी, 03 अगस्त (आदित्य न्यूज नेटवर्क): अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या-1 आशीष बैंदाड़ा ने 6 वर्ष पुराने चेक अनादरण के मामले में महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए आरोपी चंद्रप्रकाश त्रिपाठी उर्फ दीपक कुमार (पुत्र घीसलाल, निवासी सुभाष नगर कॉलोनी, सापंदा रोड) को दोषी ठहराया है। न्यायालय ने आरोपी को दो वर्ष के साधारण कारावास की सजा सुनाने के साथ परिवादी को 8 लाख रुपए प्रतिकर राशि अदा करने के आदेश पारित किए हैं। परिवादी गौतम चंद जैन पुत्र प्यारचंद जैन की ओर से अधिवक्ता मनोज आहूजा के माध्यम से प्रस्तुत परिवाद के अनुसार वर्ष 2019 में आरोपी ने 5 लाख रुपए उधार लिए थे। राशि लौटाने के तकाजे पर आरोपी ने 7 फरवरी 2020 की तिथि का बैंक चेक दिया, जो बैंक में प्रस्तुत करने पर “स्टॉप पेमेंट” के कारण अनादरित (बाउंस) हो गया। विधिक नोटिस भेजने के बावजूद भुगतान न करने पर न्यायालय में परिवाद दायर किया गया था।

अदालत में दी गई दलीलें: सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष ने नोटिस सही पते पर न मिलने व चेक गुम होने की बात कहकर परिवाद खारिज करने का आग्रह किया। इसके जवाब में परिवादी पक्ष के अधिवक्ता मनोज आहूजा, भैरूसिंह राठौड़, रवि शर्मा, अभिनव जोशी व भावेश जैन ने सर्वोच्च न्यायालय व उच्च न्यायालयों के न्यायिक दृष्टांत प्रस्तुत किए। उन्होंने तर्क दिया कि चेक गुम होने के दावे के समर्थन में प्राथमिकी दर्ज होना आवश्यक है। दोनों पक्षों की दलीलों व साक्ष्यों पर विचार करने के बाद न्यायालय ने परिवादी पक्ष के तर्कों को स्वीकार करते हुए आरोपी को दोषी करार दिया। उल्लेखनीय है कि उक्त आरोपी के खिलाफ इसी प्रकार के दो अन्य मामलों में भी दो-दो साल की सजा व 8-8 लाख रुपए प्रतिकर देने के आदेश पारित किए गए हैं।


