केकड़ी, 03 अगस्त (आदित्य न्यूज नेटवर्क): आचार्य सुंदर सागर महाराज की सुशिष्या आर्यिका सुरम्यमति माताजी ने कहा कि मानव अपने विशुद्ध भावों व कषाय रहित भावना से मोक्ष पथ की ओर अग्रसर होता है। लेकिन आज भागमभाग भरी जिंदगी में इंसान इंद्रिय विषय भोगों की ओर दौड़ रहा है व पर (दूसरों) में सुख खोज रहा है। वे बोहरा कॉलोनी स्थित नेमीनाथ मंदिर में चातुर्मासिक प्रवचन कर रही थी। उन्होंने कहा कि इंसान में इतना सामर्थ्य है कि वह जिनेन्द्र देव के चरणों में बैठकर सम्यकत्व को प्राप्त कर सकता है। किसी भी प्रकार का व्रत या नियम लेकर उसे तोड़ना ही दुःख का मूल कारण है। चौरासी लाख योनियों में भटकने के बाद पुण्य के प्रभाव से मनुष्य भव मिलता है और केवल मनुष्य ही जिनवाणी श्रवण कर अपना आत्म-हित कर सकता है। सच्चे मन व श्रद्धा से देव-शास्त्र-गुरु के प्रति आस्था रखने से सभी विघ्न दूर हो जाते हैं। ज्ञान अर्जन के लिए स्वाध्याय आवश्यक है तथा प्रभु के दर्शन मात्र से भव-भव के पाप कट जाते हैं।

धार्मिक क्रियाएं व वर्षायोग कलश स्थापना: प्रातःकाल आर्यिका ससंघ के सानिध्य में जिनाभिषेक, शांतिधारा व जिनेन्द्र अर्चना सहित दैनिक धार्मिक क्रियाएं संपन्न हुईं। प्रवचन से पूर्व श्रद्धालुओं ने शास्त्रों के अर्घ्य समर्पित किए। मीडिया प्रभारी रमेश बंसल ने बताया कि शांतिधारा करने का सौभाग्य भागचंद, ज्ञानचंद व सुनील कुमार धूंधरी परिवार को प्राप्त हुआ। आचार्य श्री के चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन, पाद-प्रक्षालन व शास्त्र भेंट का सौभाग्य कमलेश कुमार, राकेश कुमार जैन सदारी परिवार व शुभकामना परिवार (आचार्य ग्रुप) ने प्राप्त किया। वहीं मंत्रोच्चार व धार्मिक क्रियाओं के साथ पुण्यार्जकों द्वारा मंदिर में वर्षायोग कलश की स्थापना की गई। सायंकाल में आरती, भक्ति संगीत, शास्त्र स्वाध्याय, प्रश्न मंच व आनंद यात्रा का आयोजन हुआ। धर्मसभा का संचालन बा.ब्र. कनक दीदी व पं. निकेत शास्त्री ने किया।


