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श्री नेमिनाथ मंदिर में गूंजी जिनवाणी: आर्यिका सुरम्यमति माताजी ने कहा-पुण्यशाली जीव ही पा सकते हैं देव-शास्त्र-गुरु का सानिध्य

केकड़ी, 06 अगस्त (आदित्य न्यूज नेटवर्क): आचार्य सुंदर सागर महाराज की सुशिष्या आर्यिका सुरम्यमति माताजी ने कहा कि पुण्यशाली व सौभाग्यशाली जीव ही जिनेन्द्र देव के अभिषेक, शांतिधारा व जिन अर्चना का सुअवसर प्राप्त कर सकते हैं तथा देव-शास्त्र-गुरु के चरणों को पा सकते हैं। पुण्यशाली होने के लिए भी पुण्य का होना आवश्यक है। वे बोहरा कॉलोनी स्थित नेमीनाथ मंदिर में प्रवचन कर रही थी। उन्होंने कहा कि साधु-संतों की संगति व जिनवाणी के माध्यम से आत्मा पर पड़े अज्ञान के आवरण को हटाकर ज्ञान स्वरूप आत्मा को प्राप्त किया जा सकता है। व्यवहार सम्यग्दृष्टि जीव सच्चे देव-शास्त्र-गुरु के प्रति श्रद्धान करता है। वीतरागी प्रभु की भक्ति-पूजा व गुणगान से पुण्य का बंध होता है।

आत्म संतोष में छिपी है मन की शांति: माताजी ने कहा कि सत्ता व समय कभी स्थाई नहीं रहते। मन यदि भटकता है तो सत्कार्य बोझ महसूस होने लगता है, जबकि सच्ची सफलता मन की शांति व आत्मसंतोष में छिपी है। उन्होंने हिंसा, झूठ, चोरी, कुशील व परिग्रहइन पांचों पापों से बचने की प्रेरणा देते हुए कहा कि प्रतिदिन देव दर्शन करने चाहिए, रात्रि भोजन का त्याग करना चाहिए व जल हमेशा छानकर पीना चाहिए। त्याग से घबराने के बजाय छोटे-छोटे नियम लेकर अष्ट कर्मों के पापों से बचते हुए मोक्ष मार्ग पर आगे बढ़ा जा सकता है। धर्मसभा से पूर्व सकल दिगंबर जैन समाज के श्रावकों द्वारा माताजी को अर्घ्य समर्पित किए गए। धर्मसभा का संचालन ब्रह्मचारिणी कनक दीदी व पंडित निकेत शास्त्री ने किया।

केकड़ी: दीप प्रज्जवलन करते लाभार्थी परिवार के सदस्य।

ये बने सौभाग्यशाली: आचार्य श्री के चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन, पाद प्रक्षालन व शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य मुकेश कुमार, संजय कुमार, सौरभ, सिद्धार्थ, शीतल सिंहल (सदारा परिवार) तथा विमल कुमार, चेतन कुमार, नीरज, अभिषेक, मोहित व विजय बंसल (बिसूंदनी परिवार) ने प्राप्त किया। मीडिया प्रभारी रमेश बंसल व पारस जैन ने बताया कि प्रातःकाल आर्यिका ससंघ के सानिध्य में जिनाभिषेक, शांतिधारा व जिनेन्द्र अर्चना के धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। मध्याह्न में स्वाध्याय व शंका-समाधान का आयोजन किया गया। वहीं सायंकाल आरती, भक्ति संगीत, तिलोक सार ग्रंथ का वाचन व प्रश्नोत्तरी के साथ धर्मसभा संपन्न हुई।

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