हैदराबाद (तेलंगाना), 09 अगस्त (आदित्य न्यूज नेटवर्क): खरतरगच्छाधिपति आचार्य भगवंत श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी म.सा. ने कहा कि अक्सर यह सुनने को मिलता है कि आज की युवा पीढ़ी धर्म से दूर हो रही है, लेकिन उनका अनुभव इससे अलग है। आज युवा मंदिरों में दिखाई दे रहे हैं, गुरुभगवंतों के सत्संग व विहार में सेवा कर रहे हैं, तपश्चर्या में आगे बढ़ रहे हैं तथा संयम व दीक्षा के मार्ग पर भी अग्रसर हो रहे हैं। यह युवाओं की सकारात्मक दिशा का परिचायक है। वे श्री संघ शास्ता वर्षावास के अंतर्गत त्रयनगर स्थित श्री जैन श्वेताम्बर जिनकुशलसूरिजी दादाजी बाग मंदिर कारवान दादाबाड़ी में आयोजित धार्मिक सभा में मंगल प्रवचन कर रहे थे।
सूर्यवंशी के बजाय स्क्रीनवंशी बन रहा इंसान: गुरुदेव ने जीवन के दूसरे पक्ष पर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि हमें अपनी दिनचर्या और 24 घंटे के नियोजन पर विचार करना होगा। आज इंसान सूर्यवंशी होने के बजाय ‘स्क्रीनवंशी‘ होता जा रहा है। प्रातः आंख खुलते ही नवकार महामंत्र के स्मरण या माता-पिता के चरण स्पर्श के बजाय सीधे मोबाइल का लॉक खोलने की आदत बन गई है। मोबाइल एक साधन था, लेकिन आज वह मालिक बन गया है और इंसान उसका सेवक। रील्स की दुनिया एक ऐसी गुफा बन चुकी है, जिसमें प्रवेश का द्वार तो है पर बाहर निकलने का रास्ता नहीं।

अपनाएं ‘आर्ट ऑफ अनप्लगिंग’ व ‘डिजिटल फास्टिंग’: डिजिटल लत से बचाव के लिए गुरुदेव श्री ने ‘आर्ट ऑफ अनप्लगिंग‘ सीखने की प्रेरणा दी। उन्होंने सुझाव दिया कि सप्ताह में एक दिन ‘डिजिटल फास्टिंग‘ का संकल्प लें और प्रतिदिन कम से कम एक-दो घंटे मोबाइल से पूर्ण दूरी बनाएं। भोजन, परिवार के साथ संवाद तथा ध्यान-साधना के समय को ‘नो-मोबाइल जोन‘ घोषित किया जाना चाहिए। रात 10 बजे परिवार के सभी मोबाइल एक स्थान पर जमा करने का नियम बनाया जा सकता है।
FOMO नहीं, JOMO अपनाएं; दिया 6+6+6+6 का सूत्र: आचार्य श्री ने ‘FOMO’ (फियर ऑफ मिसिंग आउट) के स्थान पर ‘JOMO’ (जॉय ऑफ मिसिंग Out) को अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने समय के बेहतर नियोजन के लिए 6+6+6+6 का सूत्र बताते हुए कहा कि 6 घंटे कार्य के लिए, 6 घंटे परिवार व सामाजिक गतिविधियों के लिए, 6 घंटे विश्राम के लिए व 6 घंटे स्वयं, साधना तथा आत्मचिंतन के लिए निर्धारित करें। मोबाइल हमारी सेवा के लिए है, हमें उसकी सेवा नहीं करनी चाहिए। स्वयं को स्क्रीन से अनप्लग करने पर ही जीवन परम शांति व समाधि की ओर बढ़ेगा। प्रवचन के पश्चात मुनि विरक्तप्रभसागर महाराज ने सभी तपस्वियों की सुख-शाता पूछी तथा जानकारी दी कि अगले दिन के प्रवचन का मुख्य विषय ‘आर्ट ऑफ लिविंग‘ रहेगा।

