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निजी स्कूल के दो छात्रों में ब्रुसेला संक्रमण की पुष्टि के बाद हरकत में आया प्रशासन, प्रभावित इलाकों में स्क्रीनिंग शुरू; पशुओं की भी होगी जांच

केकड़ी, 09 अगस्त (आदित्य न्यूज नेटवर्क): एक निजी विद्यालय में लगातार बच्चों के बीमार पड़ने व दो छात्रों में ब्रुसेला संक्रमण की पुष्टि के बाद प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह मुस्तैद हो गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रभावित बच्चों के घरों व आसपास के इलाकों में घर-घर स्क्रीनिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जिला अस्पताल की चिकित्सा टीमें क्षेत्र में पहुंचकर लोगों के लक्षणों की जानकारी जुटा रही हैं और यह पता लगा रही हैं कि कोई अन्य व्यक्ति या बच्चा इसकी चपेट में तो नहीं आया है। मामला उजागर होने के बाद जिला चिकित्सालय में भर्ती अन्य बच्चों का भी सघन स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है। चिकित्सकों द्वारा लक्षणों के आधार पर आवश्यक जांचें करवाई जा रही हैं, ताकि शुरुआती स्तर पर ही किसी भी नए मामले की पहचान कर उपचार शुरू किया जा सके।

क्या है ब्रुसेला संक्रमण व इसके लक्षण: यह संक्रमण संक्रमित पशु के सीधे संपर्क में आने अथवा बिना उबले (कच्चे) दूध व दुग्ध उत्पादों के सेवन से फैलता है। इसके मुख्य लक्षणों में तेज या लंबे समय तक बुखार, कमजोरी, पसीना आना, शरीर व सिर में दर्द तथा अत्यधिक थकान शामिल हैं। इसकी पुष्टि केवल चिकित्सकीय जांच से ही संभव है। चुंकी ब्रुसेला एक बैक्टीरियल संक्रमण (ब्रुसेलोसिस) है जो मुख्य रूप से पशुओं से मनुष्यों में फैलता है, इसलिए प्रशासन ने संक्रमण का स्रोत तलाशने के लिए पशुओं की जांच पर विशेष जोर दिया है। इसके लिए पशुपालन विभाग और स्थानीय नगर पालिका के साथ समन्वय बनाकर आवारा पशुओं की स्क्रीनिंग व प्रबंधन तथा गौशालाओं में जांच के निर्देश दिए गए हैं।

इनका कहना है: इस संबंध में राजकीय जिला चिकित्सालय के पीएमओ डॉ. राजेन्द्र मौर्य ने बताया कि दो बच्चों में ब्रुसेला की पुष्टि के बाद प्रभावित क्षेत्रों में स्क्रीनिंग शुरू कर दी गई है। पशुपालन विभाग के साथ मिलकर पशुओं की जांच करवाई जा रही है। घबराने की आवश्यकता नहीं है, परंतु बच्चों में बुखार के लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लिया जाना चाहिए। वहीं उपखण्ड अधिकारी सुरेश कुमार बलाई का कहना रहा कि मामले को बेहद गंभीरता से लिया गया है। स्वास्थ्य विभाग को स्क्रीनिंग के निर्देश देने के साथ नगर पालिका व पशुपालन विभाग को शहर के आवारा पशुओं की जांच व समुचित प्रबंधन के लिए पत्र जारी किया गया है। गौशालाओं को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

हरकत में आया पशुपालन विभाग: पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डॉ अमित पारीक ने बताया कि दोनों बच्चों के घरों में किसी भी तरह के पशु नहीं पाले जाते हैं। ना ही इनके अड़ोस पडौस में कोई पशु पालते हैं। इन घरों में जहां से दूध आता है उन घरों में भी पशुओं की जांच की गई परंतु लक्षणों और हिस्ट्री के आधार पर कोई भी पशु बीमार नहीं पाया गया। स्कूल के पास स्थित डेयरी में भी पशु स्वस्थ पाए गए और अबॉर्शन की हिस्ट्री नहीं मिली। कल रीजनल लैब अजमेर की टीम द्वारा उक्त जगहों से पशुओं के दूध और खून के सैंपल लेकर जांच की जाएगी। जांच की रिपोर्ट आने पर अगर कोई पशु संक्रमित पाया जाता है तो उसका उपचार किया जाएगा। साथ ही 4 से 8 माह की मादा बछड़ियों में टीकाकरण भी किया जाएगा।

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