हैदराबाद (तेलंगाना), 14 अगस्त (आदित्य न्यूज नेटवर्क): खरतरगच्छाधिपति आचार्य भगवंत श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी म.सा. ने कहा कि स्वतंत्रता का अर्थ केवल पराधीनता से मुक्ति नहीं, बल्कि मन के मोह, क्रोध, लोभ व अहंकार से मुक्त होना ही सच्ची स्वतंत्रता है। देश की आजादी व संविधान निर्माण में जैन समाज का उल्लेखनीय योगदान रहा है। आज हमारा कर्तव्य है कि हम राष्ट्र के प्रति ईमानदार रहें, नियमों का पालन करें व अपने आचरण से देश को मजबूत बनाएं। वे श्री संघ शास्ता वर्षावास के अंतर्गत त्रयनगर स्थित श्री जैन श्वेताम्बर जिनकुशलसूरिजी दादाजी बाग मंदिर कारवान दादाबाड़ी में आयोजित धार्मिक सभा में मंगल प्रवचन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जैन धर्म में नाम की नहीं बल्कि गुणों की पूजा होती है। वर्तमान में हम परमात्मा महावीर के शासन में हैं, जिन्होंने चतुर्विध संघ की स्थापना कर मोक्ष का मार्ग दिखाया। फोटो की पूजा के संदर्भ में स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि मंदिर में केवल मूर्ति की नहीं बल्कि प्राण-प्रतिष्ठित परमात्मा की पूजा होती है; फोटो दर्शनीय है, पूजनीय नहीं।

धर्म में लगाया धन चक्रवृद्धि ब्याज सहित लौटता है: प्रश्नोत्तर कार्यक्रम के दौरान चढ़ावे के विषय पर आचार्य श्री ने कहा कि संसार की बैंक कभी भी फेल हो सकती है, लेकिन धर्म की बैंक में जमा किया गया पुण्य कभी व्यर्थ नहीं जाता। वह ब्याज, दर-ब्याज व चक्रवृद्धि ब्याज सहित लौटता है। उन्होंने कहा कि मंदिर हमारी संस्कृति की पहचान हैं, स्कूल ज्ञान व अस्पताल सेवा के माध्यम हैं; समाज को इन सभी क्षेत्रों में आगे बढ़ना चाहिए। आचार्य श्री ने जानकारी दी कि 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस पर प्रवचन के पश्चात दादाबाड़ी में विराजमान होने वाले परमात्मा महावीर स्वामी, गणधर गौतम स्वामी, आचार्य जिनेश्वरसूरी, सरस्वती देवी व परमात्मा पार्श्वनाथ के ‘भराने‘ (प्रतिमा को पूजनीय बनाने का विधान) के चढ़ावे बोले जाएंगे। भराने वालों के नाम प्रतिमाओं पर अंकित किए जाएंगे, जबकि बिराजमान के चढ़ावे प्रतिष्ठा के शुभ मुहूर्त पर अलग से होंगे।


