Homeसमाजगुरु के सानिध्य से ही मिटता है अज्ञान का अंधकार: आर्यिका सुरम्यमति...

गुरु के सानिध्य से ही मिटता है अज्ञान का अंधकार: आर्यिका सुरम्यमति माताजी

केकड़ी, 01 सितंबर (आदित्य न्यूज नेटवर्क): आचार्य सुंदर सागर महाराज की सुशिष्या आर्यिका सुरम्यमति माताजी ने कहा कि जीवन में दूसरों को बदलने के बजाय स्वयं को बदलने का प्रयास करना चाहिए। सोच में सकारात्मक बदलाव आने पर ही परिणामों में सद्कार्यों की ओर परिवर्तन संभव है। गुरु के बिना ज्ञान की प्राप्ति नहीं हो सकती। जब तक जीवन में गुरु रूपी प्रकाश नहीं आता, तब तक अज्ञान का अंधकार बना रहता है। वे बोहरा कॉलोनी स्थित नेमीनाथ मंदिर में प्रवचन कर रही थी। उन्होंने आचार्य वसुन्दी विरचित श्रावकाचार ग्रंथ के माध्यम से श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि बिरले जीव ही ऐसे होते हैं, जिन्हें सदैव गुरु की संगति का आनंद प्राप्त होता है। मानव जीवन में गुरु का होना अत्यंत आवश्यक है। मोह ऐसा कर्म है, जिससे मन निरंतर इधर-उधर भटकता रहता है, जबकि साधु परमेष्ठी मंगलकारी होते हैं।

भाद्रपद मास में धर्म-साधना का विशेष महत्व: आर्यिका माताजी ने कहा कि भाद्रपद मास जैन धर्म में अत्यंत पवित्र माना गया है। इस दौरान भक्ति, साधना, संयम, त्याग एवं धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से पुण्यार्जन किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जब तक शरीर में क्षमता है, तब तक प्रभु भक्ति एवं धर्म साधना में सक्रिय रहना चाहिए। शारीरिक असमर्थता आने के बाद त्याग, संयम और धार्मिक अनुष्ठान की भावना तो रहती है, लेकिन पूर्ण रूप से सक्रिय नहीं रह पाने का पछतावा भी होता है। उन्होंने कहा कि मानव जीवन में विचारों एवं भावों की शुद्धता का विशेष महत्व है। मनुष्य मृत्यु से तो भयभीत रहता है, लेकिन पाप कर्मों से नहीं डरता। आधा सच पूर्ण झूठ से कई गुना अधिक खतरनाक होता है।जीवन में लिया गया नियम, संयम और त्याग परिस्थितियां अनुकूल नहीं होने पर भी सुरक्षा कवच की तरह कार्य करता है।

केकड़ी: दीप प्रज्जवलन करते लाभार्थी परिवार के सदस्य।

साधु-संतों की सेवा से मिलता है पुण्य लाभ: माताजी ने कहा कि साधु-संत सदैव शुभ क्रियाओं में लगे रहते हैं। उनकी सेवा-शुश्रूषा एवं वैयावृत्ति करने से व्यक्ति को पुण्य लाभ मिलता है। समय आने पर ही भाग्योदय होता है, इसलिए मनुष्य को अपने जीवन में शुभ कार्यों और धर्म साधना के अवसरों को नहीं गंवाना चाहिए। धर्मसभा का संचालन बा.ब्र. कनक दीदी एवं पं. निकेत शास्त्री ने किया। प्रातःकाल जिनाभिषेक, शांतिधारा एवं जिनेन्द्र अर्चना सहित विभिन्न धार्मिक क्रियाएं आर्यिका ससंघ के सानिध्य में संपन्न हुईं। मध्यान्ह में आर्यिका माताजी द्वारा दैनिक स्वाध्याय के अंतर्गत गोम्मटसार जीव कांड ग्रंथ के माध्यम से स्वाध्याय एवं जिज्ञासा समाधान कराया गया।

आचार्य प्रज्ञा सागर महाराज का 54वां अवतरण दिवस मनाया: मीडिया प्रभारी रमेश बंसल एवं पारस जैन ने बताया कि चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन, पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य महावीर प्रसाद पदम कुमार जैन बीजवाड़ वाले परिवार एवं भागचंद, ज्ञानचंद, सुनील जैन धून्धरी वालों ने प्राप्त किया। वहीं भक्तामर दीप अर्चना एवं पुण्यार्जन का लाभ अग्रवाल समाज 84 महिला परिषद केकड़ी ब्लॉक एवं शम्भू कुमार मनीष कुमार घटियाली परिवार ने प्राप्त किया। दिलीप जैन ने बताया कि तपोभूमि प्रणेता आचार्य प्रज्ञा सागर महाराज का 54वां अवतरण दिवस गुरु आस्था परिवार एवं सकल दिगम्बर जैन समाज द्वारा श्रद्धा, भक्ति एवं धर्म प्रभावना के साथ मनाया गया। जन्मजयंती के शुभ अवसर पर श्रेष्ठी अनिल बंसल की ओर से श्रावकों को लड्डू वितरित किए गए।

RELATED ARTICLES