केकड़ी, 31 दिसंबर (आदित्य न्यूज नेटवर्क): पंचतीर्थ प्रणेता दिगंबर जैन आचार्य प्रज्ञा सागर महाराज ने कहा कि नव वर्ष केवल उत्सव का समय नहीं, बल्कि आत्म-निरीक्षण का क्षण है। हमें अपने पूरे वर्ष के दान, धर्म, पाप व पुण्य की सूची बनानी चाहिए। जो अच्छे कार्य अधूरे रह गए हैं, उन्हें अगले वर्ष पूर्ण करने का संकल्प करना होगा तथा जो भूलवश पाप हुए है, उनके लिए पश्चाताप कर पुनः न दोहराने का नियम लेना होगा। वे यहां बोहरा कॉलोनी स्थित नेमीनाथ मंदिर में शीतकालीन प्रवास के अवसर पर प्रवचन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार एक डॉक्टर मरीज के लिए, माता-पिता बच्चों के लिए एवं गुरु शिष्य के भविष्य के लिए कभी-कभी निर्दयी दिखते हैं, वह वास्तव में उनके हित के लिए होता है। अपनों को सुधारने के लिए किया गया गुस्सा कल्याणकारी होता है।

दूध व पानी का दिया उदाहरण: आचार्यश्री ने कहा कि जैसे इलाज के बाद मरीज डॉक्टर को भगवान मानने लगता है, वैसे ही अनुशासन जीवन को निखारता है। उन्होंने दूध व पानी का उदाहरण देते हुए समझाया कि दूध उबलकर बाहर गिर जाता है और अपना अस्तित्व खो देता है, जबकि पानी गर्म होने पर भी मर्यादा में रहता है। गुस्सा मानव प्रवृत्ति है, लेकिन हमें पानी की तरह धैर्यवान होना चाहिए ताकि हमारा अस्तित्व समाप्त न हो। समाज के अध्यक्ष ज्ञान चंद जैन (ज्वैलर्स) एवं मंत्री कैलाश जैन (मावा वाले) ने बताया कि प्रातः काल आचार्य श्री के सानिध्य में जिनाभिषेक, नित्य नियम पूजा व शांतिधारा का आयोजन हुआ। भगवान नेमिनाथ की शांतिधारा करने का सौभाग्य ज्ञान चंद सुनील कुमार जैन (ज्वैलर्स) ने प्राप्त किया।

ये बने लाभार्थी: धर्मसभा की शुरुआत में भाग चंद, ज्ञान चंद, जैन कुमार, विनय कुमार, सोनू, मोनू सावर परिवार द्वारा आचार्य पुष्पदंत सागर महाराज के चित्र का अनावरण व दीप प्रज्ज्वलन किया गया। आचार्यश्री के पाद प्रक्षालन का लाभ हगामी लाल हेमराज जैन (बड़गांव वालों) ने एवं शास्त्र भेंट करने का लाभ राजेश कुमार कमलेश कुमार (मनोहरपुरा वालों) ने प्राप्त किया। मीडिया प्रभारी पारस जैन ने बताया कि सांयकालीन कार्यक्रम के तहत आनंद यात्रा के पश्चात आचार्य श्री के निर्देशन में प्रश्नमंच व भव्य महाआरती का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।


