केकड़ी, 16 जून (आदित्य न्यूज नेटवर्क): आचार्य विनश्चय महाराज के सुशिष्य श्रमण मुनि प्रज्ञान सागर महाराज ने कहा कि जो व्यक्ति पुण्य कर रहा है, ईमानदारी से कमाई कर रहा है वह दुःख पा रहा है और जो पाप की कमाई कर रहा है, गलत कार्य कर रहा है वह ऐशो-आराम व भौतिक सुख-सुविधाओं का भोग कर रहा है। हम सोचते हैं कि ऐसा उल्टा क्यों हो रहा है, लेकिन सच यह है कि हर इंसान को अपने पिछले कर्मों का फल भुगतना पड़ता है। वे बोहरा कॉलोनी स्थित नेमिनाथ मन्दिर में आयोजित धर्मसभा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि यह जरूरी नहीं कि जो अच्छे-बुरे कर्म आप इस जन्म में कर रहे हैं, उसका फल इसी जन्म में मिल जाए, लेकिन जो कर्म आप कर रहे हैं, निश्चित ही उसका फल आपको भोगना पड़ेगा। इसलिए जो पाप कार्य करके इस जन्म में खुश हो रहा है, उसे यह जरूर सोचना चाहिए कि उसे इस गलत कार्य की सजा इस जन्म में नहीं तो अगले भव में भोगनी ही पड़ेगी। कर्मों के फल से भगवान व तीर्थंकर भी नहीं बच पाए हैं।

भक्तामर स्तोत्र के स्तवन से दूर होते हैं सब संकट: धर्मसभा में संघस्थ मुनि प्रसिद्ध सागर महाराज ने मानतुंग आचार्य द्वारा विरचित भक्तामर स्तोत्र के गुणानुवाद के माध्यम से भक्तों को प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि जब भी जीवन में कोई विपत्ति या आपदा आ जाए, तब जिनेंद्र देव की भक्ति भाव से, पूर्ण श्रद्धा व समर्पण के साथ इस स्तोत्र का मनोयोग से स्तवन करने पर सभी संकट दूर हो जाते हैं। मीडिया प्रभारी पारस जैन व रमेश बंसल ने बताया कि प्रातः जिनाभिषेक, शांतिधारा व जिनेंद्र अर्चना सहित सभी धार्मिक क्रियाएं मुनिसंघ के सानिध्य में संपन्न हुई। नेमीनाथ भगवान के प्रथम स्वर्ण कलश करने का सौभाग्य भागचंद ज्ञानचंद जैन ज्वैलर्स परिवार को प्राप्त हुआ। वहीं प्रभु की शांतिधारा करने का पुण्यार्जन रमेश चंद कमल कुमार बघेरा परिवार ने प्राप्त किया। दोपहर में ससंघ द्वारा धर्म व आध्यात्मिक भावना पर स्वाध्याय किया गया। शाम के समय आरती, भक्ति, शास्त्र सभा व स्वाध्याय सहित धार्मिक वातावरण में आनंद यात्रा संपन्न हुई।


