Monday, September 1, 2025
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खुशखबरी: 39 साल में छठी बार लबालब हुआ लसाड़िया बांध, हजारों बीघा जमीन होगी सिंचित, कभी भी बंद हो सकती है जयपुर मार्ग पर आवाजाही

केकड़ी, 13 जुलाई (आदित्य न्यूज नेटवर्क): केकड़ी क्षेत्र के किसानों व निवासियों के लिए इस बार का मानसून खुशियों की सौगात लेकर आया है। आषाढ़ मास में हुई जमकर बारिश के कारण क्षेत्र की सबसे बड़ी सिंचाई परियोजना लसाड़िया बांध छलक उठा है। यह पहली बार है जब सावन मास के दूसरे दिन ही बांध की चादर चल गई है। पिछले साल भी लसाड़िया बांध की चादर लगभग 40 दिनों तक चली थी। 406 एमसीएफटी की भराव क्षमता वाला यह बांध 16 वर्ग किलोमीटर में फैला है। इस बार छठवीं बार अपनी पूरी क्षमता पर है।

10 इंच चल रही है चादर: सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता राजेश कटारा ने बताया कि शनिवार देर शाम को बांध पर ढाई इंच की चादर चली जो रविवार सुबह तक बढ़कर 10 इंच हो गई है। हालांकि पिछले एक सप्ताह से क्षेत्र में बारिश नहीं हुई है। लेकिन डाई नदी से पानी की लगातार आवक के कारण बांध लबालब हो गया है। लसाड़िया बांध के भरने के बाद अब डाई नदी का पानी बीसलपुर बांध में जाएगा, जिससे बीसलपुर बांध में भी जलस्तर बढ़ने में मदद मिलेगी।

केकड़ी: बारिश के बाद लबालब हुआ क्षेत्र का प्रमुख लसाड़िया बांध।

महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजना है लसाड़िया बांध: लसाड़िया बांध का निर्माण 1980 में शुरू हुआ था और यह लगभग छह साल में 1986 तक बनकर तैयार हो गया था। करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित इस बांध का मुख्य उद्देश्य बीसलपुर बांध में बाढ़ नियंत्रण और सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराना है। बीसलपुर बांध के जलग्रहण क्षेत्र में केकड़ी क्षेत्र में लगभग आधा दर्जन बांध बनाए गए है। इनका लक्ष्य भारी बारिश होने पर बीसलपुर बांध में अचानक पानी की आवक को नियंत्रित करना है। लसाड़िया बांध बनने के बाद यह छठी बार है जब इसकी चादर चली है। यह बांध पूरी तरह से मिट्टी का बना हुआ है और इसकी चादर की लंबाई 335 मीटर है। बांध का जलग्रहण क्षेत्र नसीराबाद, भिनाय और सरवाड़ तक फैला हुआ है। इसमें पानी की मुख्य आवक डाई नदी से होती है। पिछली बार बांध पर वर्ष 2024 में चादर चली थी।

जयपुर-भीलवाड़ा राजमार्ग की कनेक्टिविटी पर असर: यह बांध जयपुर-भीलवाड़ा राजमार्ग से कुछ ही दूरी पर धुंवालिया गांव के पास बना हुआ है। बांध की चादर चलने पर कई बार भीलवाड़ा-जयपुर राजमार्ग बंद हो जाता है। पिछले साल बांध की चादर चलने से लगभग 40 दिनों तक पानी आया था। जिसके कारण दस दिनों तक यह मार्ग बंद रहा था। वर्ष 2019 में भी लगभग 18 दिनों तक बांध की चादर चलने से सड़क मार्ग पर पानी भर गया था, जिससे 18 दिनों तक मार्ग बाधित रहा। इसी तरह वर्ष 2022 में भी बांध की चादर चलने के कारण जयपुर-भीलवाड़ा मार्ग प्रभावित हुआ था। हजारों बीघा भूमि होगी सिंचित: लसाड़िया बांध से एक 15 किलोमीटर लंबी नहर भी बनी हुई है, जो सिंचाई के लिए महत्वपूर्ण है। इस बांध से धुंवालिया, जाल का खेड़ा, जूनियां, छाबड़िया, लसाड़िया, देवलिया, कणोंज, केसरपुरा व बघेरा की 2080 हेक्टेयर (हजारों बीघा) भूमि सिंचित होती है। बांध के भरने से किसानों में खुशी का माहौल है।

लसाड़िया बांध एक नज़र में:

निर्माण अवधि: 1980 में शुरू, 1986 में पूर्ण

उद्देश्य: बीसलपुर बांध को पानी भेजना और सिंचाई

फैलाव क्षेत्र: 16 वर्ग किलोमीटर

भराव क्षमता: 406 एमसीएफटी

नदी: डाई नदी पर निर्मित

जलग्रहण क्षेत्र: नसीराबाद, सरवाड़ व भिनाय

पूर्व में चादर चली: वर्ष 1994, 2014, 2019, 2022 व 2024

बांध की चादर की लंबाई: 335 मीटर

नहर की लंबाई: 15 किलोमीटर

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