केकड़ी, 24 सितंबर (आदित्य न्यूज नेटवर्क): नगर पालिका के नए बोर्ड के गठन के साथ ही केकड़ी शहर में विकास की उम्मीदें फिर से बढ़ गई हैं। नगर पालिका में कांग्रेस के अनिल मित्तल अध्यक्ष तथा आरएलपी के राजेन्द्र चौधरी उपाध्यक्ष निर्वाचित हुए हैं। ऐसे में शहरवासियों की नजर अब इस बात पर है कि नया बोर्ड केकड़ी की लंबे समय से चली आ रही समस्याओं के समाधान के लिए कितनी गंभीरता और गति के साथ काम करता है। केकड़ी में विकास की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन शहर के सामने आधारभूत सुविधाओं से जुड़े कई ऐसे मुद्दे हैं, जिनका स्थायी समाधान जरूरी है। शहरवासियों की प्रमुख अपेक्षाओं में बेहतर ड्रेनेज सिस्टम, सीवरेज व्यवस्था, गुणवत्तापूर्ण सड़कें, यातायात सुधार, स्वच्छता, जल प्रबंधन, पार्क एवं खेल सुविधाओं का विकास, अतिक्रमण पर प्रभावी कार्रवाई और आवारा पशुधन से निजात जैसे मुद्दे शामिल हैं।
ड्रेनेज और सीवरेज व्यवस्था में सुधार जरूरी: बारिश के दौरान शहर के कई हिस्सों में जलभराव की समस्या सामने आती है। ऐसे में पूरे शहर के लिए वैज्ञानिक एवं स्थायी ड्रेनेज प्लान तैयार किए जाने की जरूरत है। प्रमुख जलभराव वाले क्षेत्रों को चिन्हित कर बरसाती पानी की निकासी के लिए स्थायी व्यवस्था विकसित की जाए। शहर में जहां सीवरेज लाइन बिछाई जा चुकी है, उसे तत्काल शुरू किया जाए तथा शेष क्षेत्रों को भी चरणबद्ध तरीके से सीवरेज नेटवर्क से जोड़ा जाए। घर-घर कचरा संग्रहण व्यवस्था का विस्तार कर नियमित एवं प्रभावी बनाया जाए। ठोस कचरा प्रबंधन के तहत कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण की व्यवस्था हो।

अनियोजित कॉलोनियों और अतिक्रमण पर लगे रोक: शहर के सुनियोजित विकास के लिए अनधिकृत एवं अनएप्रूव्ड कॉलोनियों पर प्रभावी रोक जरूरी है। अतिक्रमण की समस्या से निपटने के लिए नियमित अभियान चलाने के साथ संबंधित जिम्मेदारियों को स्पष्ट किया जाना चाहिए। सफाई व्यवस्था में सफाईकर्मियों और जमादारों की वार्डवार जवाबदेही तय हो, ताकि व्यवस्था में लापरवाही की गुंजाइश कम हो। हर वार्ड में बने पार्षद कार्यालय: आमजन को छोटी-छोटी समस्याओं के लिए पालिका कार्यालय के चक्कर न लगाने पड़ें, इसके लिए वार्डवार पार्षद कार्यालय अथवा शिकायत निवारण केंद्र स्थापित किए जा सकते हैं। शिकायतों की ऑनलाइन एवं ऑफलाइन मॉनिटरिंग की व्यवस्था हो और शिकायत के निस्तारण की समय-सीमा तय की जाए।
सड़क निर्माण में गुणवत्ता सबसे बड़ा सवाल: शहर में सड़कों की गुणवत्ता लंबे समय से महत्वपूर्ण मुद्दा है। नई सड़कों के निर्माण में उच्च गुणवत्ता वाली सीसी अथवा आवश्यकतानुसार अन्य टिकाऊ तकनीक का इस्तेमाल किया जाए। सड़क निर्माण में निर्धारित गुणवत्ता मानकों का सख्ती से पालन हो तथा निर्माण कार्य की स्वतंत्र निगरानी व्यवस्था विकसित की जाए। सड़कों के निर्माण एवं मरम्मत में संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय भी जरूरी है। पीडब्ल्यूडी, जलदाय विभाग, दूरसंचार, बिजली विभाग और नगर पालिका आपसी तालमेल से पहले ही भूमिगत एवं अन्य कार्य पूरे करें, ताकि नई सड़क बनने के बाद बार-बार उसकी खुदाई न करनी पड़े।

भारी वाहनों के प्रवेश और पार्किंग की समस्या का समाधान: शहरी क्षेत्र में भारी वाहनों के प्रवेश को नियंत्रित करने के साथ उनके लिए शहर के बाहर अथवा उपयुक्त स्थान पर पार्किंग/स्टैंड विकसित किया जाना चाहिए। इससे बाजार क्षेत्रों में यातायात दबाव कम करने में मदद मिल सकती है। प्रमुख बाजारों एवं व्यस्त मार्गों पर यातायात व्यवस्था के लिए स्थायी कार्ययोजना बनाए जाने की जरूरत है। केकड़ी-जयपुर, केकड़ी-कोटा, केकड़ी-ब्यावर, केकड़ी-अजमेर एवं केकड़ी-भीलवाड़ा मार्गों पर बढ़ते यातायात को देखते हुए सड़क सुरक्षा एवं यातायात प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत है। पर्याप्त चौड़ाई, डिवाइडर, यातायात संकेतक, स्ट्रीट लाइट एवं आवश्यक स्थानों पर पार्किंग व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए।
खेल अकादमी और आधुनिक सुविधाओं की जरूरत: केकड़ी में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है। शहर में खेल अकादमी की स्थापना कर विभिन्न खेलों के लिए प्रशिक्षकों एवं प्रशिक्षण सुविधाओं की व्यवस्था की जाए। मल्टीप्लेक्स, सार्वजनिक पार्क, इंडोर स्टेडियम एवं युवाओं के लिए मनोरंजन तथा खेल सुविधाओं का विस्तार भी शहर की जरूरतों में शामिल है। सब्जी मंडी स्थित गांधी पार्क की नियमित देखरेख के लिए स्थायी कर्मचारी की नियुक्ति की जाए। शहर के अन्य पार्कों का भी विकास एवं रखरखाव सुनिश्चित किया जाए।

आवारा पशुधन से मिले राहत: शहर की सफाई व्यवस्था और यातायात में सबसे बड़ी बाधाओं में आवारा पशुधन भी शामिल है। सड़कों, बाजारों और प्रमुख मार्गों पर बड़ी संख्या में आवारा पशुओं के विचरण से न केवल यातायात प्रभावित होता है, बल्कि दुर्घटनाओं की आशंका भी बनी रहती है। पशुओं द्वारा जगह-जगह गंदगी किए जाने से सफाई व्यवस्था पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इस समस्या के समाधान के लिए केवल समय-समय पर धरपकड़ अभियान चलाने के बजाय स्थायी एवं प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने की जरूरत है। आवारा पशुओं के लिए निर्धारित स्थान की व्यवस्था करने के साथ नियमित धरपकड़ अभियान चलाया जाए तथा पशुओं को सड़कों पर छोड़ने वाले पशुपालकों की जिम्मेदारी तय कर संबंधित नियमों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।
यातायात होगा सुगम: इसी के साथ पकड़े गए पशुओं की देखरेख और उनके स्थायी प्रबंधन की भी व्यवस्था हो। आवारा पशुधन पर प्रभावी नियंत्रण होने से सड़कों पर यातायात सुगम होगा, दुर्घटनाओं का खतरा कम होगा और शहर की सफाई व्यवस्था में भी उल्लेखनीय सुधार हो सकता है। इसके अलावा सड़कों एवं सार्वजनिक स्थलों पर पशुओं के कारण होने वाली गंदगी कम होने से सफाई व्यवस्था पर होने वाले अतिरिक्त खर्च में भी कमी लाई जा सकती है। ऐसे में यह मुद्दा केवल पशुधन नियंत्रण तक सीमित नहीं, बल्कि शहर की स्वच्छता, यातायात और सड़क सुरक्षा से सीधे जुड़ा हुआ है।

जल संरक्षण और पेयजल पर भी हो फोकस: शहर के भविष्य को देखते हुए जल संरक्षण को भी पालिका के एजेंडे में शामिल किया जाना चाहिए। बड़े तालाब सहित अन्य जलस्रोतों में कचरा डालने पर प्रभावी रोक लगे। जलस्रोतों के संरक्षण एवं सौंदर्यीकरण के कार्यों को गति दी जाए। वर्षा जल संचयन को प्रोत्साहित करने के साथ सार्वजनिक भवनों एवं प्रमुख परिसरों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था विकसित की जा सकती है। पेयजल से जुड़ी शिकायतों के त्वरित समाधान और लीकेज जैसी समस्याओं के लिए संबंधित विभागों के साथ समन्वय की स्थायी व्यवस्था भी जरूरी है।
स्ट्रीट लाइट और सार्वजनिक सुविधाएं भी हों प्राथमिकता: शहर की प्रमुख सड़कों, बाजारों, कॉलोनियों और सार्वजनिक स्थलों पर पर्याप्त स्ट्रीट लाइट सुनिश्चित की जाए। खराब लाइटों की शिकायत के तत्काल निस्तारण के लिए वार्डवार व्यवस्था हो। सार्वजनिक शौचालयों की संख्या बढ़ाने के साथ उनके नियमित रखरखाव पर भी ध्यान दिया जाए। पारदर्शिता के साथ हो विकास कार्य: नए बोर्ड के सामने सबसे महत्वपूर्ण अपेक्षा विकास कार्यों में गुणवत्ता और पारदर्शिता की है। सड़क, नाली, पार्क, प्रकाश व्यवस्था अथवा अन्य निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से समझौता नहीं होना चाहिए। कार्यों की प्रगति, लागत और निर्धारित समयावधि की जानकारी सार्वजनिक किए जाने से जवाबदेही बढ़ सकती है।

अब नए बोर्ड की अग्निपरीक्षा: नगर पालिका का नया बोर्ड गठित हो चुका है और शहरवासियों ने अपनी अपेक्षाएं भी सामने रख दी हैं। अब देखना यह होगा कि इन समस्याओं को केवल घोषणाओं और प्रस्तावों तक सीमित रखा जाता है या इनके समाधान के लिए चरणबद्ध और समयबद्ध कार्ययोजना तैयार की जाती है। ड्रेनेज, सीवरेज, सड़क, यातायात, सफाई, जल संरक्षण, अतिक्रमण और आवारा पशुधन जैसे मुद्दों पर ठोस कदम उठे तो केकड़ी के विकास को नई दिशा मिल सकती है। शहरवासियों की नजर अब नए बोर्ड के शुरुआती फैसलों और धरातल पर दिखाई देने वाले काम पर टिकी है।

