Homeहैल्थ एण्ड लाइफ स्टाइलत्याग, सेवा व सुमिरन ही है स्थायी सुख का मार्ग; मानस योग...

त्याग, सेवा व सुमिरन ही है स्थायी सुख का मार्ग; मानस योग साधना शिविर में साधकों ने सीखा जीवन जीने का विज्ञान

केकड़ी, 13 जून (आदित्य न्यूज नेटवर्क): बढ़ते कदम संस्थान व तप सेवा सिमरन समिति के संयुक्त तत्वावधान में कटारिया ग्रीन में आयोजित मानस योग साधना शिविर में शनिवार को इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर साइंटिफिक स्पिरिचुअलिज्म मेरठ की आध्यात्मिक प्रमुख श्यामा दीदी एवं राधा दीदी ने सहभागिता की। इस दौरान साधकों को सेवा, तप व सुमिरन के महत्व से अवगत कराते हुए श्यामा दीदी ने कहा कि साधना का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत सुख-शांति नहीं, बल्कि समाज कल्याण में सार्थक भूमिका निभाना है। उन्होंने कहा कि तप का अर्थ अपने सुख में कटौती कर दूसरों के लिए मार्ग प्रशस्त करना है, जबकि सेवा का अर्थ दूसरों तक सुख पहुंचाना है। मनुष्य की इच्छाओं की वास्तविक निवृत्ति व आत्मकल्याण भी सेवा से ही संभव है। उन्होंने लोगों से प्राप्त ज्ञान को व्यवहार में उतारने का आह्वान किया।

रामचरितमानस सिखाता है जीवन जीने की वैज्ञानित पद्धति: शिविर को संबोधित करते हुए डॉ. गोपाल शास्त्री ने कहा कि आज अधिकांश लोग सुख की खोज में हैं, लेकिन स्थायी सुख का मार्ग त्याग, सेवा व ईश्वर स्मरण से होकर गुजरता है। रामचरितमानस जीवन जीने की वैज्ञानिक व व्यावहारिक पद्धति सिखाता है। तप व्यक्ति को आत्मअनुशासन सिखाता है, सेवा मानवता से जोड़ती है व सुमिरन मानसिक संतुलन प्रदान करता है। जीवन में लेने की अपेक्षा देने की भावना बढ़े तो व्यक्ति तनाव व नकारात्मकता से मुक्त होकर आनंद की ओर अग्रसर हो सकता है।

केकड़ी: मानस योग साधना शिविर के दौरान योगाभ्यास करते साधक।

योग अभ्यास से हुई शुरुआत, अतिथियों ने की सराहना: शिविर के सुबह के सत्र में साधकों को योग अभ्यास करवाया गया। कार्यक्रम में अतिथि के रूप में उपस्थित उद्यमी बृजेश पारीक एवं पूर्व प्रधान सीमा चौधरी ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज में आध्यात्मिक चेतना व नैतिक मूल्यों को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इससे पूर्व शिविर में आगमन पर श्यामा दीदी एवं राधा दीदी का आयोजकों व साधकों द्वारा आत्मीय स्वागत किया गया। कार्यक्रम का संचालन कवि बुद्धि प्रकाश दाधीच ने किया।

RELATED ARTICLES