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पुरुषार्थ व संयम से ही संभव है आत्म-बोध, दान व धर्म में लगाएं धन: आर्यिका सुरम्यमति माताजी

केकड़ी, 12 सितंबर (आदित्य न्यूज नेटवर्क): आचार्य सुंदर सागर महाराज की सुशिष्या आर्यिका सुरम्यमति माताजी ने कहा कि पुरुषार्थ के साथ-साथ भाग्योदय व धर्ममय जीवन ही सफलता का वास्तविक मार्ग है। बाह्य प्रदर्शन के बजाय असहायों की सेवा, संयम और त्याग से ही जीवन में आत्म-बोध प्राप्त किया जा सकता है। वे बोहरा कॉलोनी स्थित नेमीनाथ मंदिर में प्रवचन कर रही थी। उन्होंने कहा कि इंसान पुरुषार्थ करने में कोई कमी नहीं रखता, लेकिन भाग्योदय न होने से सफलता प्राप्त नहीं कर पाता। लोग मान-सम्मान के बाह्य प्रदर्शन में धन लगा देते हैं, पर असहाय, दीन व निराश्रितों के प्रति धन खर्च करने में हिचकिचाते हैं। धन और पद के अहंकार में किया गया कार्य विनाश का कारण बनता है। धन को कोई साथ नहीं ले जा सकता, इसलिए इसका सदुपयोग हमेशा दान, धर्म और पुण्य कार्यों में करना चाहिए।

मुनि निंदा घोर पाप का कारण: आर्यिका माता जी ने धर्मोपदेश में कहा कि केवल पूजा व जिनाभिषेक करना ही मात्र धर्म नहीं है, बल्कि संयम और त्याग धारण करने पर ही वास्तविकता को पाया जा सकता है। मुनि निंदा से बचना चाहिए क्योंकि यह घोर पाप का कारण है। अक्सर लोग दूसरों में कमियां देख लेते हैं लेकिन स्वयं को पहचान नहीं पाते। अन्न का कण और साधु का क्षण कभी बर्बाद नहीं करना चाहिए, क्योंकि एक छोटा सा अवगुण हजारों गुणों पर हावी हो जाता है। मीडिया प्रभारी रमेश बंसल व पारस जैन ने बताया कि आचार्य श्री के चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन, पाद-प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य कांतादेवी, अशोक कुमार, ज्ञानचंद, अवनीश, संजय कुमार व हिमांशु सिंहल परिवार बघेरा वालों ने प्राप्त किया।

रोट तीज पर्व आज: धर्मसभा से पूर्व प्रातःकाल आर्यिका ससंघ के सानिध्य में जिनाभिषेक, शांतिधारा व जिनेन्द्र अर्चना सहित समस्त धार्मिक क्रियाएं संपन्न हुईं। मध्यान्ह में माता जी द्वारा गोम्मटसार जीवकांड ग्रंथ का दैनिक स्वाध्याय व श्रद्धालुओं की जिज्ञासाओं का समाधान किया गया। दिलीप जैन के अनुसार शाम को आरती, भक्ति संगीत, स्वाध्याय, प्रश्नोत्तरी व आनंद यात्रा सहित विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित हुए। धर्मसभा का संचालन बा. ब्र. कनक दीदी व निकेत शास्त्री द्वारा किया गया। आगामी 13 सितंबर को जैन धर्मावलंबियों द्वारा त्रैलोक्य रोट तीज पर्व मनाया जाएगा।

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