केकड़ी, 16 जून (आदित्य न्यूज नेटवर्क): बढ़ते कदम संस्थान व तप सेवा सिमरन समिति के संयुक्त तत्वावधान में कटारिया ग्रीन में आयोजित मानस योग साधना शिविर में सोमवार को डॉ. गोपाल शास्त्री ने ‘स्वास्थ्य, आहार व आत्मकल्याण‘ विषय पर मार्गदर्शन दिया। उन्होंने कहा कि वास्तविक स्वास्थ्य का अर्थ स्वयं में स्थित होना है। बुखार या अन्य रोगों के दौरान भूख कम लगना, मुंह का स्वाद कड़वा होना व शरीर में टूटन महसूस होना वास्तव में प्रकृति द्वारा स्वास्थ्य सुधार के संकेत हैं, जो बताते हैं कि शरीर विश्राम व सीमित आहार चाहता है। तप, सेवा व सुमिरन केवल आध्यात्मिक साधनाएं नहीं, बल्कि शरीर, मन व बुद्धि को संतुलित करने का वैज्ञानिक माध्यम हैं।

प्राकृतिक आहार पर दिया बल: डॉ. शास्त्री ने स्वास्थ्य संरक्षण के लिए प्राकृतिक आहार पर बल देते हुए दिन में अधिकाधिक कच्चे भोजन, फल, सलाद व हरी पत्तियों के सेवन का सुझाव दिया। उन्होंने बताया कि रात्रि भोजन के बाद अगले दिन सुबह 11 बजे तक उपवास रखें, जिसे हरी पत्तियों के रस से तोड़ें। इसके दो घंटे बाद सलाद व चटनी लें और शाम को पका हुआ भोजन करें। उन्होंने “सीजनल, रीजनल व ओरिजिनल” भोजन की अवधारणा पर जोर देते हुए कम से कम 21 दिनों तक अनाज कम कर सलाद व प्राकृतिक खाद्य पदार्थों को प्रमुखता देने का आह्वान किया।

भोजन को प्रसाद बनाएं, जीवन में आएगी खुशहाली: उन्होंने कहा कि भोजन को प्रसाद बनाने की परंपरा जीवन का महत्वपूर्ण संस्कार है। भोजन ग्रहण करने से पूर्व तथा धन, संसाधन व जीवन की प्रत्येक उपलब्धि में से ईश्वर का भाग निकालने की भावना होनी चाहिए, यही जीवन में समृद्धि व संतोष का आधार है। इस अवसर पर आरटीओ अधिकारी महेश पारीक ने साधना से जीवन में आए सकारात्मक परिवर्तनों को साझा करते हुए इन स्वास्थ्य सूत्रों को व्यावहारिक बताया। वहीं प्रिंसिपल अशोक जेतवाल, संतोष राठी व कृष्णगोपाल नामा ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए साधना व प्राकृतिक जीवनशैली के लाभों पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन कवि बुद्धिप्रकाश दाधीच ने किया।


