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गुरु पूर्णिमा पर बही भजनों की सरिता: श्रद्धालुओं ने गुरुपाद पूजन कर लिया आशीर्वाद, चल मंदिर बना आकर्षण का केंद्र

केकड़ी, 30 जुलाई (आदित्य न्यूज नेटवर्क): श्री जैन श्वेताम्बर तपागच्छ संघ के तत्वावधान एवं साध्वी विशेषमाला श्रीजी म.सा. आदि ठाणा 6 की पावन निश्रा में बुधवार को गुरु पूर्णिमा का पर्व अत्यंत श्रद्धा, भक्ति व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर श्री सीमंधर स्वामी, श्री गौतम स्वामी, गच्छाधिपति आचार्य यशोवर्म सूरी महाराजा एवं साध्वी विशेषमाला श्रीजी म.सा. के पावन चरणों का पूजन-वंदन किया गया। श्री गौतम स्वामी पूजन के मुख्य लाभार्थी लालचंद पवन कुमार पदम कुमार तातेड़ परिवार रहे। साध्वीजी को ग्रंथ बोहराने का लाभ राजेन्द्र कुमार सुरेंद्र कुमार धूपिया परिवार तथा पंच ज्ञान पूजा का लाभ लाभचंद दीपक कुमार अमित कुमार धूपिया परिवार ने लिया। साध्वीजी के पाद पूजन का लाभ चंद्रशीतल नवयुवक मंडल ने लिया। इसके अलावा 21 अन्य श्रावक-श्राविकाओं के जोड़ों ने भी गौतम स्वामी के पगलों का विधिपूर्वक पूजन किया।

भजनों पर झूमे श्रद्धालु: नवयुवक मंडल के अध्यक्ष सुमित धूपिया ने बताया कि बिजयनगर से आए संगीतकार बंटी बाफना व सांझ वादक मंडली ने गुरु में संसार समायानाम है तेरा तारनहाराजैसे भजनों की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। इस मौके पर सब्जी मंडी स्थित ओसवाल संस्था भवन में एक भव्य चल मंदिर (पीठिका) का निर्माण कराया गया, जो आगामी चार माह तक दर्शनार्थ रहेगा। चल मंदिर में श्री चंद्रशीतल बहु मंडल द्वारा गहुंली बनाई गई, जिसे वृक्ष स्वरूप देकर अक्षत, फल, पुष्प, दीपकों व गुरु पदचिन्हों से सजाया गया। चल मंदिर में भगवान पार्श्वनाथ, भगवान आदिनाथ एवं श्री गौतम स्वामी को विराजमान किया गया। अपराह्र 4 बजे सब्जी मंडी स्थित आत्मवल्लभ आराधना भवन में श्री चंद्रशीतल नवयुवक मंडल व श्री चंद्रशीतल बहु मंडल द्वारा साध्वीजी का पाद पूजन किया गया। सदस्यों ने चरणों में वासक्षेप पूजन किया।

बताया गुरु का महत्व: इस अवसर पर साध्वी विशेषमाला ने गुरु परंपरा व गुरु भक्ति का महत्व बताते हुए कहा कि जीवन में गुरु का होना अत्यंत आवश्यक है। जिस प्रकार वाहन को सुरक्षित चलाने के लिए एक्सेलेरेटर व ब्रेक दोनों चाहिए, उसी तरह मानव जीवन को सही मार्ग पर चलाने के लिए गुरु का मार्गदर्शन जरूरी है। गुरु शिष्य के सच्चे पथ-प्रदर्शक होते हैं। संध्या समय में ओसवाल संस्था भवन में चल मंदिर के समक्ष गुरु भक्ति का आयोजन हुआ, जिसमें साध्वीजी ने भजनों की माला पिरोई। अंत में गुरुजी हमारो अंतर्नाद, हमने आपो आशीर्वादके जयकारों से भवन गूंज उठा। इस दौरान बाहर से आए अनेक श्रद्धालुओं ने भी दर्शन-पूजन का लाभ लिया।

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