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नेमिनाथ जैन मंदिर में धर्मसभा: आर्यिका सुरम्यमति माताजी बोलीं— बाह्य दिखावे में फिजूलखर्ची करते हैं लोग, धार्मिक कार्यों में व्यय करने में संकोच

केकड़ी, 31 जुलाई (आदित्य न्यूज नेटवर्क): आचार्य सुंदर सागर महाराज की सुशिष्या आर्यिका सुरम्यमति माताजी ने कहा कि दान करने से जीव को पुण्य की प्राप्ति होती है व उत्तम भोग भूमि मिलती है। हालांकि दान की सार्थकता तभी है जब वह निष्काम भाव से किया जाए। दान करने में कभी भी प्रदर्शन, दिखावा या अहंकार नहीं होना चाहिए। यदि दान में दिखावा आ जाए तो उसका पुण्य प्रभाव क्षीण हो जाता है। वे बोहरा कॉलोनी स्थित नेमीनाथ मंदिर में प्रवचन कर रही थी। उन्होंने कहा कि आज व्यक्ति बाह्य दिखावे के कार्यों में धन को पानी की तरह बहा देता है व फिजूलखर्ची करता है, लेकिन धार्मिक या परमार्थ के कार्यों में दान स्वरूप व्यय करने में संकोच करता है।

शुभ कर्मों से ही मिलता है धर्म मार्ग: आर्यिका माताजी ने कहा कि मानव के जब अशुभ कर्मों का क्षय होता है व शुभ कर्मों का उदय होता है, तभी वह धर्म कार्य में लीन होकर जीवन के सही लक्ष्य को प्राप्त कर पाता है। संसार सागर में अनंतानंत जीव रहते हैं, परंतु कुछ ज्ञानी जीव ही अहिंसा धर्म का पालन कर पाप कर्मों से बचते हैं व अपने जीवन का कल्याण करते हैं। धर्मसभा का संचालन कनक दीदी व पंडित निकेत शास्त्री द्वारा किया गया।

केकड़ी: दीप प्रज्जवलन करते लाभार्थी परिवार के सदस्य।

धार्मिक अनुष्ठान व सौभाग्यशाली परिवार: प्रातःकाल आर्यिका ससंघ के सानिध्य में जिनाभिषेक, शांतिधारा व जिनेंद्र अर्चना सहित धार्मिक क्रियाएं संपन्न हुईं। आचार्य श्री के चित्र अनावरण, दीप प्रज्ज्वलन, माता श्री के पाद प्रक्षालन व शास्त्र भेंट का सौभाग्य ओम प्रकाश, गोविंद कुमार, राजकुमार, योगेश कुमार, अंकुर व अभिषेक जैन सदारा परिवार ने प्राप्त किया। मीडिया प्रभारी पारस जैन व रमेश बंसल ने बताया कि मध्यान्ह में आर्यिका संघ द्वारा गुरु भक्ति, स्वाध्याय व प्रतिक्रमण किया गया। सांध्यकालीन सत्र में आरती, भक्ति संगीत, स्वाध्याय, शास्त्र सभा, प्रश्न मंच व जिज्ञासा समाधान के साथ आनंद यात्रा संपन्न हुई।

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