केकड़ी, 31 जुलाई (आदित्य न्यूज नेटवर्क): आचार्य सुंदर सागर महाराज की सुशिष्या आर्यिका सुरम्यमति माताजी ने कहा कि मनुष्य को हमेशा हित, मित व प्रिय वचन बोलने चाहिए। हमारे मुखारविंद से ऐसे शब्द निकलने चाहिए जो सामने वाले के हित में हों, संक्षिप्त हों व सुनने वाले को प्रिय लगें। वे बोहरा कॉलोनी स्थित नेमीनाथ मंदिर में प्रवचन कर रही थी। उन्होंने कहा कि बोलने से पहले सोच-विचार कर बोलना चाहिए, क्योंकि मुख से शब्द निकलने के बाद सोचना व्यर्थ हो जाता है। आर्यिका माताजी ने जीवन में राग, द्वेष व हिंसा से बचने का संदेश देते हुए कहा कि किसी भी प्रकार का दान करने के पश्चात उसे वापस ग्रहण कर लेना या दान की घोषणा करके मुकर जाना घोर पाप का बंध करता है। भारतवर्ष की पवित्र भूमि पर जन्म लेना व भारतीय संस्कृति को अपनाना अत्यंत सौभाग्य की बात है, इसलिए इस अनमोल मानव जीवन को धार्मिक व सत्कार्यों में लगाकर आत्म-कल्याण करना चाहिए।

धार्मिक अनुष्ठान व भक्तिमय माहौल: प्रातःकाल आर्यिका ससंघ के सानिध्य में जिनाभिषेक, शांतिधारा व जिनेंद्र अर्चना सहित विभिन्न धार्मिक क्रियाएं विधि-विधान से संपन्न हुईं। आचार्य श्री के चित्र का अनावरण, दीप प्रज्ज्वलन, माताजी के पाद प्रक्षालन व शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य महेंद्र कुमार, जयेश कुमार, सौरभ व अंकेश रांटा परिवार ने प्राप्त किया। मीडिया प्रभारी पारस जैन व रमेश बंसल ने बताया कि प्रातःकाल आर्यिका संघ ने नगर स्थित समस्त जिनालयों के दर्शन व वंदना की। मध्यान्ह में गुरु भक्ति, स्वाध्याय व प्रतिक्रमण का आयोजन हुआ। वहीं संध्या समय महाआरती, भक्ति संगीत, शास्त्र सभा, प्रश्न मंच व जिज्ञासा समाधान के साथ आनंद यात्रा संपन्न हुई। धर्मसभा का संचालन कनक दीदी व पंडित निकेत शास्त्री ने संयुक्त रूप से किया।

1 अगस्त को आयोजित होगा चातुर्मास कलश स्थापना समारोह: समाज के अध्यक्ष ज्ञानचंद जैन (ज्वैलर्स) व मंत्री कैलाश जैन (मावा) ने संयुक्त रूप से जानकारी देते हुए बताया कि आगामी 1 अगस्त को दोपहर में देवगांव गेट स्थित गौशाला परिसर में ‘सन्मति सुंदर वर्षायोग-26‘ का भव्य चातुर्मास कलश स्थापना कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। चातुर्मास कलश स्थापना समारोह से पूर्व धर्मरूपी मंगल ध्वजारोहण भागचंद, ज्ञानचंद, जैन कुमार, विनय कुमार, वर्धमान, सोनू व मोनू भगत परिवार द्वारा किया जाएगा।


