केकड़ी, 17 अगस्त (आदित्य न्यूज नेटवर्क): आचार्य सुंदर सागर महाराज की सुशिष्या आर्यिका सुरम्यमति माताजी ने कहा कि इस कलिकाल में इंसान ही इंसान का दुश्मन बन रहा है। जलन इंसान की जिंदगी का सुकून छीन लेती है और अहंकार इंसानियत को मिटा देता है। किसी की असली ताकत ऊंची इमारतें या गाड़ियां नहीं, बल्कि संवेदनाएं और संस्कार होते हैं। वे बोहरा कॉलोनी स्थित नेमीनाथ मंदिर में प्रवचन कर रही थी। उन्होंने कहा कि संसार में दुख-संकट आने पर प्रभु स्मरण और आस्था से भी संकट दूर हो जाते हैं। मानव जीवन को सार्थक बनाने के लिए त्याग और समभाव रखना आवश्यक है। किसी के द्वारा किया गया उपकार कभी नहीं भूलना चाहिए।

धार्मिक क्रियाएं: मीडिया प्रभारी रमेश बंसल ने बताया कि प्रातःकाल आर्यिका ससंघ के सानिध्य में जिनाभिषेक, शांतिधारा व जिनेन्द्र अर्चना की गई। धर्मसभा में आचार्य श्री के चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन, पाद प्रक्षालन व शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य मेहरूकलां निवासी रमेश चंद, शकुंतला, अनिल कुमार, प्रीति, सन्नू व स्वाति बंसल परिवार को प्राप्त हुआ। मध्याह्न में गोम्मटसार जीवकांड ग्रंथ का स्वाध्याय व जिज्ञासा समाधान हुआ, जबकि सायं समय आरती, भक्ति और त्रिलोक सार ग्रंथ का स्वाध्याय संपन्न हुआ। दिलीप जैन ने बताया कि मंगलवार को आर्यिका ससंघ के सानिध्य में 22वें तीर्थंकर श्री नेमिनाथ भगवान का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा। कार्यक्रम का संचालन पंडित निकेत शास्त्री ने किया।


