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5 साल पुराने मुकदमों को टारगेटेड श्रेणी से बाहर करने की मांग, 3 सितंबर को कार्य बहिष्कार का ऐलान

केकड़ी, 02 सितंबर (आदित्य न्यूज नेटवर्क): राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा प्रकरणों के त्वरित निस्तारण के उद्देश्य से लागू की गई टारगेटेड केसपॉलिसी को लेकर जिला बार एसोसिएशन ने कड़ा विरोध जताया है। बार एसोसिएशन के सदस्यों ने अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रवीण कुमार वर्मा को ज्ञापन सौंपा व न्यायालय परिसर में नारेबाजी कर नीति का विरोध किया। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सीताराम कुमावत के नेतृत्व में दिए गए ज्ञापन में स्पष्ट किया गया कि अधिवक्ता समुदाय लंबित प्रकरणों के शीघ्र निस्तारण का पक्षधर है, लेकिन केवल संख्यात्मक लक्ष्य पूरा करने के दबाव से न्याय की गुणवत्ता व पक्षकारों के हित प्रभावित हो सकते हैं। ज्ञापन में राजस्थान उच्च न्यायालय जोधपुर द्वारा जारी आदेश/परिपत्र (प्रकरण संख्या GEN/XV/55/2024/1809 दिनांक 11 अगस्त 2026) का संदर्भ देते हुए मांग की गई कि अत्यधिक पुराने प्रकरणों की प्राथमिकता बरकरार रखते हुए पांच वर्ष पुराने सामान्य मुकदमों को टारगेटेड केस की श्रेणी से पृथक रखा जाए।

न्याय की गुणवत्ता से समझौता मंजूर नहीं: अधिवक्ताओं का कहना है कि पर्याप्त समय मिलने पर ही साक्ष्य, जिरह, दस्तावेज प्रस्तुतीकरण व प्रभावी बहस का उचित अवसर मिल पाता है। यह मांग न्यायपालिका के विरोध में नहीं, बल्कि न्याय की गुणवत्ता व पक्षकारों के अधिकारों की रक्षा के लिए उठाई गई है। ज्ञापन में बताया कि इस नीति के विरोध स्वरूप गुरुवार 3 सितंबर 2026 को बार एसोसिएशन के सभी सदस्य न्यायिक कार्य से विरत रहेंगे। इस दौरान अध्यक्ष सीताराम कुमावत व कार्यकारिणी पदाधिकारियों सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता उपस्थित रहे। अधिवक्ताओं ने न्यायिक अधिकारियों से व्यावहारिक कठिनाइयों को समझते हुए सहयोग की अपील की है।

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