केकड़ी, 08 सितंबर (आदित्य न्यूज नेटवर्क): आचार्य सुंदर सागर महाराज की सुशिष्या आर्यिका सुरम्यमति माताजी ने कहा कि मनुष्य मान और कषाय के कारण अपने पारिवारिक संबंधों में दरार पैदा कर लेता है। ऐसे में मान का त्याग कर नम्रता और निर्मल परिणामों से संबंधों में आई खटास को समाप्त कर पुनः मधुर संबंध स्थापित करने चाहिए। वे बोहरा कॉलोनी स्थित नेमीनाथ मंदिर में प्रवचन कर रही थी। उन्होंने कहा कि कान में भरा गया जहर जन्म-जन्मांतर के संबंधों को खराब कर देता है। मधुर वचन संबंधों में प्रगाढ़ता लाते हैं, जबकि कठोर वचन कलह का कारण बनते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार नाखून बढ़ने पर नाखूनों को काटा जाता है, उंगलियों को नहीं; ठीक उसी प्रकार रिश्तों में दरार आने पर दरार को दूर करना चाहिए, रिश्तों को नहीं।

निष्काम भक्ति से मिलता है फल: माताजी ने कहा कि निष्काम भाव से की गई जिन-भक्ति राई के समान होने पर भी सुमेरु पर्वत के समान महान फल देने वाली होती है। धर्म कार्य के प्रति विश्वास और आस्था ही जीवन का मूल आधार है। कार्यक्रम के दौरान कपूरचंद, विनोदकुमार, शुभम (मेहरुकलां वाले) व महावीरप्रसाद, महेंद्र कुमार, रमेश कुमार, निखिल, सर्वम (रांटा बघेरा वाले) परिवार ने आचार्य श्री के चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन, पाद-प्रक्षालन व शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य प्राप्त किया। संचालन कनक दीदी व पंडित निकेत शास्त्री ने किया।

दिनभर आयोजित हुए धार्मिक कार्यक्रम: मीडिया प्रभारी रमेश बंसल व पारस जैन ने बताया कि प्रातः काल आर्यिका ससंघ के सानिध्य में जिनाभिषेक, शांतिधारा व जिनेन्द्र अर्चना सहित दैनिक धार्मिक क्रियाएं संपन्न हुईं। मध्याह्न में आर्यिका माताजी द्वारा गोम्मटसार जीवकांड ग्रंथ का स्वाध्याय व श्रद्धालुओं की जिज्ञासाओं का समाधान किया गया। दिलीप जैन के अनुसार संध्याकालीन भक्तामर आराधना व दीप अर्चना का पुण्यार्जन विशुद्ध वर्धिनी महिला मंडल तथा इंदर चंद, संजयकुमार, पार्थ व तन्मय जैन (जूनिया वाले) परिवार को मिला।

