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वाणी का घाव जन्म-जन्म के रिश्तों को करता है प्रभावित, समय की अहमियत समझें: आर्यिका सुरम्यमति माताजी

केकड़ी, 10 सितंबर (आदित्य न्यूज नेटवर्क): आचार्य सुंदर सागर महाराज की सुशिष्या आर्यिका सुरम्यमति माताजी ने कहा कि यदि समय को समय पर पहचान कर उसकी अहमियत को समझ लिया जाए तो समय भी व्यक्ति का ध्यान रखता है। किसी भी कार्य को कल के भरोसे नहीं छोड़ना चाहिए, क्योंकि कल कभी काल बन सकता है। वे बोहरा कॉलोनी स्थित नेमीनाथ मंदिर में प्रवचन कर रही थी। उन्होंने कहा कि हमेशा हित, मित व प्रिय वचन बोलने चाहिए। गोली का लगा घाव समय के साथ भर सकता है, लेकिन वाणी का घाव जन्म-जन्मांतर के रिश्तों को प्रभावित कर देता है। भाद्रपद माह नियम, संयम और छोटे-छोटे व्रतों के माध्यम से आत्म-कल्याण की ओर अग्रसर होने का पावन पर्व है।

णमोकार मंत्र की महिमा: माताजी ने कहा कि  तप, त्याग और संयम से की गई आराधना से मन में धर्म के प्रति अनुराग उत्पन्न होता है। धर्म कोई भय का विषय नहीं, बल्कि श्रद्धा और भावना से की जाने वाली क्रिया है। उन्होंने सचेत करते हुए कहा कि रसना (जिह्वा) इंद्रिय की लोलुपता के कारण मनुष्य अभक्ष्य पदार्थों का सेवन कर बैठता है, जिससे उसका स्वास्थ्य और धर्म दोनों प्रभावित होते हैं। विपत्ति के समय यदि पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ महामंत्र णमोकार मंत्र का जाप व अनुष्ठान किया जाए तो सभी संकट दूर हो जाते हैं। संचालन बाल ब्रह्मचारी कनक दीदी व पंडित निकेश शास्त्री के निर्देशन में संपन्न हुआ।

केकड़ी: माताजी के पाद प्रक्षालन करते लाभार्थी परिवार के सदस्य।

दिनभर आयोजित हुए धार्मिक कार्यक्रम: मीडिया प्रभारी रमेश बंसल व पारस जैन ने बताया कि श्री जिनेन्द्र भगवान की शांतिधारा करने का सौभाग्य भागचंद, ज्ञानचंद, जैन कुमार, विनय कुमार, वर्धमान, सोनू, मोनू व भागचंद सावर वाले परिवार ने प्राप्त किया। वहीं, आचार्य श्री के चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन, पाद प्रक्षालन व शास्त्र भेंट का पुण्यार्जन चौथमल, रामनिवास (गुलगांव वाले) तथा संपत लाल, धर्मचंद गोयल (बिसूंदनी वाले) परिवार को मिला। प्रातःकाल आर्यिका ससंघ के सानिध्य में जिनाभिषेक, शांतिधारा व जिनेन्द्र अर्चना सहित समस्त धार्मिक क्रियाएं संपन्न हुईं। मध्यान्ह में गोम्मटसार ग्रंथ के माध्यम से स्वाध्याय एवं श्रद्धालुओं की जिज्ञासाओं का समाधान किया गया।

भक्तामर विधान का आयोजन शुक्रवार को: दिलीप जैन ने बताया कि सायंकाल आरती, भक्ति संगीत, आनंद यात्रा व भक्तामर आराधना के दौरान दीप अर्चना करने का सौभाग्य धर्मचंद, प्रवीण कुमार गोयल (मेहरू कलां), ओम प्रकाश अनिल कुमार (जूनियां), मुक्तागिरि यात्रा (सुंदर सुरम्य ग्रुप), सत्यनारायण, अशोक कुमार (जूनियां) तथा ओम प्रकाश, गोविंद कुमार (सदारा) परिवार ने प्राप्त किया। जैन ने बताया कि 21 दिवसीय भक्तामर आराधना व दीप अर्चना का समापन आर्यिका ससंघ के सानिध्य में शुक्रवार 11 सितंबर को होगा। इस अवसर पर प्रातः धर्मसभा स्थल पर भव्य भक्तामर विधान का आयोजन किया जाएगा।

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