Homeसमाजनिर्दोष व निर्लोभ परिणाम ही उत्तम शौच धर्म: आर्यिका सुरम्यमति माताजी

निर्दोष व निर्लोभ परिणाम ही उत्तम शौच धर्म: आर्यिका सुरम्यमति माताजी

केकड़ी, 19 सितंबर (आदित्य न्यूज नेटवर्क): आचार्य सुंदर सागर महाराज की सुशिष्या आर्यिका सुरम्यमति माताजी ने कहा कि उत्तम शौच धर्म अमृत के समान और अचूक औषधि है, जो जन्म, जरा व मृत्यु के भयंकर दुखों से छुड़ाकर अल्पकाल में मोक्ष सुख की प्राप्ति करा देता है। शौच धर्म मुक्ति का द्वार है। उपासना, आराधना व भक्ति धर्म के पास लाती है, जबकि वासना अपने आप से दूर ले जाती है। जीवन में आकांक्षाओं को कभी बढ़ाने का प्रयास नहीं करना चाहिए, क्योंकि ये कभी पूर्ण नहीं होतीं। सीमित दायरे में रहकर लोभ प्रवृत्ति से बचना चाहिए, लोभ से दूर रहकर ही जीवन में खुशहाली लाई जा सकती है। वे बोहरा कॉलोनी स्थित नेमीनाथ मंदिर में दशलक्षण पर्व के चतुर्थ दिवस उत्तम शौच धर्म पर प्रवचन कर रही थी। उन्होंने कहा कि निर्दोष व निर्लोभ परिणाम का होना ही शौच धर्म है। उत्कृष्ट लोभ से निवृत्ति ही शौच धर्म का मूल है। लोभ को पाप का बाप कहा जाता है, क्योंकि लोभी व्यक्ति सभी प्रकार के पापों में प्रवृत्त हो जाता है। जितनी-जितनी कषायों की कमी होगी, उतना-उतना शौच धर्म प्रकट होता जाएगा। किसी को केवल शारीरिक चोट पहुंचाना ही नहीं, बल्कि उसके प्रति दुर्भावना रखना भी हिंसा की श्रेणी में आता है। दोषों को दूर कर गुणों को ग्रहण करना ही वास्तविक संस्कार है।

धार्मिक अनुष्ठान एवं पूजन विधान: प्रातःकाल आर्यिका ससंघ के सानिध्य में जिनाभिषेक, शांतिधारा व जिनेन्द्र अर्चना सहित दैनिक धार्मिक क्रियाएं संपन्न हुईं। मध्यान्ह में आर्यिका माताजी द्वारा आचार्य उमास्वामी विरचित तत्वार्थ सूत्र के चौथे अध्याय का स्वाध्याय एवं धर्मावलंबियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया गया। बा.ब्र. कनक दीदी व पं. निकेत शास्त्री के निर्देशन में सकल दिगंबर जैन समाज द्वारा सुमधुर संगीतमय लहरियों के बीच दस लक्षण धर्म विधान एवं उत्तम शौच धर्म की विशेष पूजा-अर्चना की गई। मीडिया प्रभारी पारस जैन व रमेश बंसल ने बताया कि आचार्यश्री के चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन, पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य सौधर्म इन्द्र विमलकुमार, चेतनकुमार, अभिषेक, मोहित, नीरज, विजय, आशीष, ऋषभ, सम्यक बंसल बिसुन्दनी परिवार ने प्राप्त किया। श्रीजी की शांतिधारा करने का पुण्यार्जन कैलाशचंद, प्रकाशचंद, पीयूष कुमार, नितेश कुमार बघेरा परिवार एवं ओमप्रकाश, गोविन्द कुमार, योगेश, अंकुर, अभिषेक सदारा परिवार को मिला।

केकड़ी: विधान पर श्रीफल अर्घ्य समर्पित करते श्रद्धालुगण।

9वें तीर्थंकर पुष्पदंत भगवान का मोक्ष कल्याणक मनाया: कार्यक्रम के दौरान 9वें तीर्थंकर श्री पुष्पदंत भगवान का मोक्ष कल्याणक पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। निर्वाण मोदक चढ़ाने का सौभाग्य श्रीमती कंचन देवी, विमल कुमार, राजेन्द्र कुमार, रमेशचंद, प्रबल बंसल मेहरूकलां परिवार तथा भागचंद, ज्ञानचंद, जैनकुमार, विनय कुमार, वर्धमान, सोनू, मोनू भगत सावर परिवार ने प्राप्त किया।दिलीप जैन ने बताया कि संध्या काल में भक्तिमय संगीत के साथ आरती एवं सौधर्म इन्द्र परिवार द्वारा महाआरती संपन्न की गई। इसके उपरांत आर्यिका माताजी के सानिध्य में धार्मिक आनंद यात्रा आयोजित हुई। ज्ञान की परीक्षा और आत्मा की उत्कर्ष यात्रा के तहत आदिनाथ बहु मंडल एवं त्रिशला महिला मंडल के संयुक्त तत्वावधान में कौन बनेगा ज्ञानपति प्रतियोगिता का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

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