हैदराबाद (तेलंगाना), 23 अगस्त (आदित्य न्यूज नेटवर्क): खरतरगच्छाधिपति आचार्य भगवंत श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी म.सा. ने कहा कि यदि परिवार में शांति है तो समाज में भी शांति बनी रहती है। परिवार में अशांति हो तो व्यक्ति का जीवन और भक्ति दोनों प्रभावित होते हैं। उन्होंने कहा कि भाई का रिश्ता अनमोल होता है, लेकिन इसमें जितनी गहराई होती है, मनमुटाव होने पर दूरी बढ़ने का खतरा भी उतना ही रहता है। इसलिए इस रिश्ते को प्रेम, विनय और समझदारी से संभालना आवश्यक है। वे श्री संघ शास्ता वर्षावास के अंतर्गत त्रयनगर स्थित श्री जैन श्वेताम्बर जिनकुशलसूरिजी दादाजी बाग मंदिर कारवान दादाबाड़ी में आयोजित धर्मसभा में भाई-भाई के आपसी प्रेम, त्याग और मर्यादा पर मंगल प्रवचन कर रहे थे।

रामायण और प्रभु महावीर के जीवन से दी सीख: आचार्यश्री ने रामायण के प्रेरक प्रसंगों का उल्लेख करते हुए लक्ष्मण और भरत के त्याग को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि आज समाज को स्वार्थ का चश्मा छोड़कर त्याग का चश्मा पहनने की जरूरत है। इसके साथ ही भगवान महावीर के जीवन का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि ज्ञान और वैभव में श्रेष्ठ होने के बावजूद प्रभु महावीर ने दीक्षा लेने से पूर्व अपने बड़े भाई नंदीवर्धन से आज्ञा ली थी। यह प्रसंग सिखाता है कि बड़ा हमेशा बड़ा होता है और बड़ों की मर्यादा बनाए रखना ही संस्कारी परिवार की पहचान है।

संपत्ति बांट लें, लेकिन प्रेम नहीं: गुरुदेवश्री ने भावपूर्ण शब्दों में कहा कि यदि कभी परिस्थितियोंवश संपत्ति बांटनी भी पड़े तो बांट लेना, लेकिन आपसी प्रेम को कभी मत बांटना। संबंधों की कोई कीमत नहीं होती। यदि किसी भाई से कोई मनमुटाव हो गया हो, तो बिना देर किए आलिंगन और नमस्कार से सारे गिले-शिकवे दूर कर लेने चाहिए। जीवन की सबसे बड़ी पूंजी धन नहीं, बल्कि अपनों का साथ और परिवार का प्रेम है।


