हैदराबाद (तेलंगाना), 01 अगस्त (आदित्य न्यूज नेटवर्क): खरतरगच्छाधिपति आचार्य भगवंत श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी म.सा. ने कहा कि प्रश्न केवल जानकारी तक सीमित रहता है, जबकि ‘जिज्ञासा‘ जीवन व आचरण में बदलाव लाती है। शंका मन के विष के समान है जिसका तत्काल समाधान आवश्यक है, अन्यथा यह सम्यक्त्व को दुर्बल करती है। गुरु के कठोर व्यवहार को शिष्य निर्माण का माध्यम बताते हुए उन्होंने कहा कि जिस प्रकार कुम्हार मिट्टी को और सुनार सोने को तराशता है, उसी तरह सद्गुरु अनुशासन से साधक के व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं। वे श्री संघ शास्ता वर्षावास के अंतर्गत त्रयनगर स्थित श्री जैन श्वेताम्बर जिनकुशलसूरिजी दादाजी बाग मंदिर कारवान दादाबाड़ी में आयोजित धार्मिक सभा में मंगल प्रवचन कर रहे थे।

आगम की महत्ता पर डाला प्रकाश: आचार्यश्री ने भगवतीसूत्र आगम की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि केवलज्ञान प्राप्ति के पश्चात् परमात्मा द्वारा दी गई दिव्य वाणी को गणधर भगवंतों ने आगमों में पिरोया। उपलब्ध 45 आगमों में सबसे विशाल ‘भगवतीसूत्र‘ में लगभग 36,000 प्रश्नों के माध्यम से जीवन के गूढ़ रहस्यों का समाधान समाहित है। प्रश्नोत्तरी के दौरान आचार्य श्री ने देवद्रव्य, ज्ञानद्रव्य, गुरुद्रव्य, साधारण द्रव्य व जीवदया द्रव्य का उपयोग केवल उसी समर्पित उद्देश्य के लिए करने की स्पष्ट व्यवस्था समझाई। अंत में उन्होंने श्रद्धालुओं से अपने भीतर मोक्ष की पात्रता जागृत करने का आह्वान किया। इस अवसर पर चातुर्मास समिति के प्रधान संयोजक कुशल कांकरिया सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

आगामी कार्यक्रम व बाल संस्कार शिविर: मुनि विरक्तप्रभसागरजी म.सा. ने बताया कि प्रत्येक शनिवार प्रवचन में प्रश्नोत्तरी का आयोजन रहेगा, जिसमें श्रद्धालु अपनी जिज्ञासाएं निर्धारित पात्र में डाल सकते हैं। वहीं रविवार को गुरुदेव के श्रीमुख से “मां ही महोत्सव” विषय पर विशेष प्रवचन होगा। साथ ही प्रति रविवार दोपहर 3 से 5 बजे बाल संस्कार शिविर आयोजित किया जाएगा (पंजीकरण के लिए ज्ञानवाटिका प्रमुख विक्रम सिंह ढड्ढा से संपर्क किया जा सकता है। समारोह का संचालन प्रितेश बोहरा ने किया। उन्होंने चातुर्मास साधर्मिक भक्ति के लाभार्थी ‘खरतरगच्छ जैन श्री संघ, फीलखाना‘ व तीन दिवसीय सेवा के लाभार्थी ‘आदिनाथ महिला मंडल, सीना बेकरी‘ की अनुमोदना की।


