केकड़ी, 15 सितंबर (आदित्य न्यूज नेटवर्क): नगर पालिका चुनाव के बाद शहर को मिले नए बोर्ड में शिक्षा व अनुभव का दिलचस्प संगम देखने को मिल रहा है। 40 वार्डों से निर्वाचित पार्षदों की शैक्षणिक योग्यता का विश्लेषण करें तो बोर्ड में उच्च शिक्षा प्राप्त चेहरों के साथ ही सीमित औपचारिक शिक्षा वाले जनप्रतिनिधि भी शामिल हैं। आंकड़ों की खास बात यह है कि 40 में से 28 पार्षद यानी 70 प्रतिशत कम से कम 10वीं या उससे अधिक शिक्षित हैं, जबकि 16 पार्षद यानी 40 प्रतिशत स्नातक अथवा उससे अधिक शैक्षणिक योग्यता रखते हैं। नए बोर्ड में 5 पार्षद स्नातकोत्तर डिग्रीधारी हैं। वहीं 11 पार्षद स्नातक अथवा व्यावसायिक डिग्रीधारी हैं। इस तरह परिषद के हर पांच में से दो पार्षदों के पास स्नातक या उससे ऊपर की शिक्षा है।

पांच पार्षद पीजी, 11 के पास स्नातक डिग्री: नए बोर्ड में उच्च शिक्षा प्राप्त चेहरों में केदार शर्मा (एमए, डी.फार्मा), अभिलाषा विजय (एमए), बंटी माली (एमए), पूजा सोनी (एमए, बीएड) व पुनीत गर्ग (एमकॉम) शामिल हैं। इसके अलावा राजेंद्र चौधरी (आरएलपी) एलएलबी हैं। वहीं बोर्ड में 11 पार्षद स्नातक अथवा व्यावसायिक डिग्रीधारी हैं। इनमें बीए, बीकॉम, बीएससी, एलएलबी और ग्रेजुएट स्तर की शिक्षा वाले पार्षद शामिल हैं। आंकड़ों के अनुसार अरविंद कांसोटिया (बीएससी), राजेंद्र चौधरी 007 (बीए), मोहित वैष्णव (बीकॉम), मुकेश शर्मा (बीए), पूजा व्यास (बीए), प्रतिभा जैन (बीए), राजकुमार शर्मा (बीए), अनिल मित्तल (बीकॉम), पूजा जगरवाल (ग्रेजुएट) व इंदिरा मित्तल (बीए) सहित स्नातक स्तर के चेहरे बोर्ड में हैं।

अन्य पार्षदों की शैक्षणिक योग्यता: बोर्ड में शामिल 7 पार्षद 12वीं पास हैं। इनमें सोनू चाड़ा, रिंकू चौधरी, हनुमान बाथरा, भंवर लाल बज, कैलाश चौधरी, रितेश जैन व अजय जगरवाल शामिल हैं। वहीं 5 पार्षद 10वीं पास हैं, जिनमे पीयूष धोबी, सुमन कुमारी जाट, सीमा शर्मा, विनीत जैन व आशाराम वैष्णव शामिल है। इसी प्रकार 12 पार्षद ऐसे हैं जिनकी औपचारिक शैक्षणिक योग्यता 10वीं से कम है या जो केवल साक्षर हैं। इनमें विजय लक्ष्मी दाधीच, ललित कुमार व राजेंद्र चौधरी (पटेल) 8वीं पास हैं, शिवप्रताप 9वीं पास तथा सुमन नायक व हेमराज माली 5वीं पास हैं। इसके अलावा धन्नालाल डसानियां, मगनी देवी, सलमा बेगम, दिलखुश जाट व गिरिराज खटीक साक्षर हैं, जबकि सदाम देवी अनपढ़ हैं।

फेक्ट फाइल: आंकड़ों की सबसे बड़ी तस्वीर यह है कि 40 में से 28 पार्षद यानी 70 प्रतिशत 10वीं या उससे अधिक शिक्षित हैं। इनमें 16 पार्षद स्नातक या उससे अधिक शिक्षित हैं। दूसरी ओर 12 पार्षद ऐसे हैं जिनकी औपचारिक शिक्षा 10वीं से कम है अथवा जो साक्षर/अनपढ़ श्रेणी में आते हैं। यानी नए बोर्ड में एक ओर उच्च शिक्षित व डिग्रीधारी पार्षद हैं तो दूसरी ओर जमीनी अनुभव व स्थानीय सामाजिक जुड़ाव वाले प्रतिनिधि भी मौजूद हैं।

अब डिग्री नहीं, फैसलों व कामकाज की होगी असली परीक्षा: नए बोर्ड की शैक्षणिक तस्वीर भले ही विविधता से भरी हो, लेकिन आने वाले पांच साल में पार्षदों की असली परीक्षा उनकी डिग्रियों से नहीं बल्कि शहर के विकास, जनसमस्याओं के समाधान, नगरपालिका के प्रभावी संचालन व जनता के प्रति जवाबदेही से होगी। केकड़ी की जनता ने 40 वार्डों में अलग-अलग सामाजिक व शैक्षणिक पृष्ठभूमि वाले प्रतिनिधियों को चुनकर भेजा है। अब देखना होगा कि शिक्षा, अनुभव व जनसरोकार का यह मिश्रण शहर के विकास में कितना प्रभावी साबित होता है।

