Homeधर्म एवं संस्कृतिभागवत कथा महोत्सव में सजाई छप्पन भोग की झांकी, गोवर्धन प्रसंग व...

भागवत कथा महोत्सव में सजाई छप्पन भोग की झांकी, गोवर्धन प्रसंग व असुर संहार की लीला सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु, सोमवार को होगी पूर्णाहुति

केकड़ी, 17 मई (आदित्य न्यूज नेटवर्क): कथा वाचक पंडित बुद्धिप्रकाश दाधीच ने कहा कि भगवान की प्रत्येक लीला धर्म, प्रेम, करुणा व मानव कल्याण की प्रेरणा देती है। पूतना वध, शकटासुर, तृणावर्त, बकासुर व अघासुर जैसे दैत्यों के संहार के प्रसंग यह संदेश देते हैं कि जब-जब संसार में अधर्म व अन्याय बढ़ता है, तब-तब ईश्वर धर्म की पुनः स्थापना करते हैं। वे पुरानी केकड़ी स्थित प्राचीन चारभुजा नाथ मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव के दौरान शनिवार रात्रि को कथा वाचन करते हुए बोल रहे थे। उन्होंने गोवर्धन लीला का विस्तृत वर्णन करते हुए कहा कि यह प्रसंग केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि प्रकृति संरक्षण, पर्यावरण संतुलन, गौसेवा व सामूहिक एकता का सनातन संदेश है। भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र पूजा के स्थान पर गोवर्धन पर्वत की पूजा कर यह स्पष्ट किया कि मानव जीवन का अस्तित्व प्रकृति, जल, वन, पर्वत व गौमाता से जुड़ा हुआ है।

केकड़ी: भागवत कथा का श्रवण करते श्रद्धालु।

भक्ति रस में सराबोर हुए श्रद्धालु: इस दौरान उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य बाल लीलाओं, असुर संहार व गोवर्धन प्रसंग का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया। कथा श्रवण के दौरान श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर दिखाई दिए तथा मंदिर परिसर राधे-कृष्णगोविंद बोलो हरि गोपाल बोलोके जयघोषों से गुंजायमान हो उठा। इस अवसर पर चहक दाधीच ने भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित भावपूर्ण वेणु गीत की प्रस्तुति दी, जिसने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। श्रद्धा, भक्ति व आध्यात्मिक उल्लास के साथ यह आयोजन अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है। कथा की पूर्णाहुति सोमवार को होगी। इस अवसर पर विशेष प्रातःकालीन सत्र में सुबह 8 बजे कथा प्रारंभ होकर 10 बजे विश्राम होगा। इसके पश्चात वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूर्णाहुति व हवन का आयोजन किया जाएगा।

दरबार में सजा छप्पन भोग, बंटा प्रसाद: कथा महोत्सव के दौरान महावीर मूंदड़ा के संयोजन में भगवान श्री चारभुजा नाथ के दरबार में आकर्षक छप्पन भोग सजाया गया। विभिन्न प्रकार के व्यंजन, मिष्ठान व प्रसाद से सुसज्जित छप्पन भोग के दर्शन कर श्रद्धालु निहाल हो गए। मंदिर के पुजारी रामेश्वर पाराशर ने विधि-विधान के साथ महाआरती संपन्न करवाई। महाआरती के पश्चात श्रद्धालुओं को छप्पन भोग का प्रसाद वितरित किया गया। देर रात तक मंदिर परिसर भजन, संकीर्तन व आध्यात्मिक अनुभूति के रंग में रंगा रहा।

RELATED ARTICLES